देखो देखो वह हँस रहें हैं । देखो वह खुशियाँ मना रहें हैं । न्यूज़ीलैंड के आतंकी हमले के बाद कुछ ऐसा पढ़ने को मिला । यार तुम ग़लीज़ ही क्यों देखते हो,देखो इनसे बहुत ज़्यादा तादात में लोग हमले की भत्सर्ना कर रहें हैं । लोग अफ़सोस कर रहें हैं । तुम उनपर ही क्यों अटके हो जो भटके हुए हैं ।
हर दौर में,हर दुर्घटना पर खुशी और गम दोनो मनाने वाले लोग मिलेंगे । तुम उनकी बात करो,जो इंसान हैं । उनका ज़िक्र ही क्यों करो जो सिर्फ इंसान की सूरत पाए हैं ।
पूरी दुनिया मे सिर्फ दो ही तरह के लोग हैं । एक नफ़रत के ख़िलाफ़ और एक नफ़रत के साथ,यही एक विषय है, जहाँ बीच का रास्ता नही बचता । मेरी समझ से उन्हें देखो और मज़बूत करो जो दुर्घटनाओं पर दुःखी होते हैं ।उनका ज़िक्र ही मत करो,जो खुश होकर अपने इंसान ना होने का सुबूत बराबर देते रहते हैं ।
हर हमला और हर मासूम की मौत हमे सिखाकर जाती है कि अपने अन्दर की नफरत मार दो,वरना पता नही कब तुम्हारे खुद के हाथ मे खून लग जाए । न्यूज़ीलैंड समेत पूरी दुनिया इस हमले के खिलाफ है ।पीड़ितों के साथ है, इसको महसूस करो नाकि इसपर अटके रहो की किसने ट्वीट किया,किसने नही किया ।
एक ग़म का वक़्त है, पूरी दुनिया ऐसी कट्टरपंथी सोच से जूझ रही है । यह दक्षिणपंथ के हावी होने का समय है ऐसे में समझ,धैर्य और साहस को जितनी मज़बूती से पकड़ सकिये पकड़िए । इस वक़्त जब हर ओर नफरत फैलाने वालों को जगह मिल रही है, खुद को इससे बचाए रखिये,अपने परिवार को बचाए रखिये,बच्चों को प्रेम सिखाइये ।
जो इस वक़्त दूसरों पर अटके हैं कि फ़लाने हंस रहें, ढीमाक ने ट्वीट नही किया या देर में किया,वह सम्भल जाएँ । लक्ष्मण के चोटिल होने पर रावण के ग़मज़दा होने की कल्पना मूर्खता है । लक्ष्मण का मूर्छित होना राम के सहयोगियों के ग़म का विषय था,उन्होंने ग़म किया और उबरे भी,यह नही कहा कि देखो रावण इसपर हँस रहा है । ठीक कर्बला में हुसैन की शहादत पर ज़ैनब ने यह नही कहा कि देखो यज़ीद हँस रहा या गम नही कर रहा,बल्कि खुद ही निकली और यज़ीद को इतिहास में कलंक साबित कर दिया ।
अब बस इतना करो,खुद में प्रेम और करुणा भरो...यही हर शहादत कहकर जा रही । ज़रा सा वक़्त है, सम्भल जाओ । इस गुमान में मत रहना की तुम खलनायक नही बन सकते हो,क्योंकि हम सबमे नफ़रत पलटी है । किसी मे निकल आती है, किसी मे हारी हुई पड़ी रहती है ।इसका एक ही इलाज है,प्रेम ।
No comments:
Post a Comment