कई बार फाँसी का फंदा मौत नही लाता बल्कि उस सिंघासन का अंत लाता है जिसके राज में कभी सूरज नही डूबता था । मैं बहुत बातें करके संवेदनाओं को झकझोरने का हिमायती नही हूँ,जिसमे संवेदनाएँ होंगी वह एक झटके में ज़ुल्म के खिलाफ होगा । उसे रोती हुई बच्चों की तस्वीरों की ज़रूरत नही,उसे गिड़गिड़ाती हुई आवाज़ सुनने की ज़रूरत नही,उसे खून से लथपथ औरतों के चेहरे देखने की ज़रूरत नही,जो संवेदनशील है, वह ज़ुल्म के खिलाफ ही होगा बिना अगर मगर लेकिन वेकिन लगाए बगैर,भले खुद मिट जाए ।
जब भगत सिंह,राजगुरु और सुखदेव ज़िन्दा थे,तब देश मे बहुत से राजे महाराजे थे । उनके पास सैनिक और हथियार भी थे ।पैसा और लोग भी थे,नही था तो जिगरा, यह सोच ही नही पाते थे कि इतनी विराट ब्रिटिश सेना से वह लड़ पाएँगे । मगर यह नवजवान जिनके पास न सेना थी,न धन था,न जायदाद थी और न ही हथियार थे,मगर था तो जिगर था,इच्छा शक्ति थी,खुद पर विश्वास था कि वह विराट से विराट शासन के ज़ुल्म के खिलाफ लड़ सकते हैं और लड़ गए ।
यह हमें सिखा गए,ज़ुल्मी चाहे कितना ही प्रचंड भीड़ वाला हो,चाहे कितने ही लाव लश्कर वाला हो,चाहे कितना ही कुटिल हो,चाहे कितना ही मक्कार क्यों न हो,अगर तुम्हारे सीने में धड़कता दिल ज़िन्दा है, तो उससे भिड़ जाओ ।तुम्हारे सीने की चौड़ाई,या जिस्म की लंबाई मायने नही रखती बल्कि तुम्हारा जिगरा यानी इच्छाशक्ति मायने रखती है ।
उठो और यह सीखो की ज़ुल्म के ख़िलाफ़ ज़ुल्म नही करेंगे । उठो और यह सीखो की ज़ुल्म को बर्दाश्त नही करेंगे । उठो और तय करो भारत सबके लिए खुशहाल बनाएंगे ।जहां आंसू नही होंगे,जहां बेबसी नही होगी,जहां गैरबराबरी नही होगी,जहां धर्म के नामपर खून नही बहने देंगे,जहां जातियों में बंटे लोगों को एक करेंगे,जहां लड़कियां उतनी ही आज़ाद होंगी जितना लड़के...भगत सिंह को याद करना,तो खुद को तैयार करना नफरत के खिलाफ,वरना रस्म अदायगी के लिए तो बहुत लोग याद करेंगे । यह मत सोचना की वह खत्म हो चुके चलो नमन लिखकर निकल लें । शहीद मरा नही करते और ऊपर से भगत सिंह तो हरगिज़ भी नही ।
जिन्हें भगत सिंह और दूसरे स्वतन्त्रता सेनानियों के सम्बंध में कड़वाहट याद आ रही हो,यह वही मक्कार लोग हैं जो न भगत के हैं और न दूसरे सेनानियों के । यह ढोंगी हैं, क्योंकि यह न भगत सिंह को मानते हैं और न उनकी मानते हैं । इनको पहचान लो,यह कभी स्वतन्त्रता संग्राम पर भगत के कंधे का इस्तेमाल करके हमला करते हैं, तो कभी सुभाष का तो कभी गांधी का,क्योंकि यह निहायत मक्कार हैं । इनसे बचो और भगत सिंह का भारत बनाने में लगो जहां प्रेम हो,हर एक मे प्रेम....
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