अगर आप न्यूज़ीलैंड की घटना के बाद उनकी पीएम और जनता को देख लहालोट हो रहें तो रुक जाइये । ज़ाहिर है गुलाब चाहे जितना अच्छा लगे,हम गुलाब नही बन सकते । चाँद चाहे जितना अच्छा लगे मगर हम चाँद नही बन सकते । झरने चाहे कितने खूबसूरत लगें हम झरना नही बन सकते यहाँ तक दुनिया की कितनी ही खूबसूरत औरत या मर्द को देख लें मगर चाहकर वैसा नही बन सकते ।
हम बन सकते हैं, वह किरदार,जो दुनिया को खूबसूरत लगता है । वह तरीका अपना सकते हैं, जिसपर हम लहालोट होते हैं । न्यूज़ीलैंड से सीखिए की दर्द पर मरहम कैसे रखा जाता है । तक़लीफ़ पर क्या बर्ताव किया जाता है ।रोती हुई आँखों से किस तमीज़ से पेश आया जाता है । नफरत को घुटने के बल कैसे बैठाया जाता है ।
आइंदा जब कभी ऐसी घटनाएं हों,होंगी क्योंकि पागलपन बढ़ ही रहा है । तब सीखिए की सिर्फ पोस्ट लिख देने से काम नही चलेगा ।कैंडिल जलाकर खड़े होना पुराना हो गया,फिर भी गनीमत है । उठियेगा और पीड़ित समुदाय को गले लगाइएगा । उनके धर्म,उनके भरोसे को जानिएगा । उनके तरीकों को इज़्ज़त से मानियेगा ।
अगर हमला आतंकियों का है और शिकार कोई हिन्दू है । तो उनके मंदिरों तक फूल ले जाइए,तिलक लगाइए । गीता के पद्य तेज़ तेज़ मिलकर दोहराइये । ऐसे लगे जैसे धर्म आतंकियों की गोली का निशाना भले हो,मगर वह हम सबमें बिखर कर फैल गया है और उन सबके गले लगकर भरोसा दीजिये नफरत के ख़िलाफ़, हम सब एक हैं ।
अगर किसी आतंकी घटना में या लिंचिंग में मुसलमान मारा जाता है धर्म के नामपर,तो मस्जिदों में फूल भेजिए,उस समुदाय को गले लगाइए,उस समुदाय को पढ़िए,कुरान को तेज तेज़ पढ़िए । एक वक्त नमाज़ साथ पढ़िए और कहिये,भाई, नफरत के खिलाफ हम सब एक हैं ।
अगर कोई घटना में सभी तरह के लोग मारे जाएँ, तो सर्वधर्म सभा कीजिये ।नमाज़ और पूजा साथ कीजिये ।तिलक लगाकर सर सजदे में झुकाइये ।चीख़कर कहिये की नफरत के खिलाफ,हम सब एक हैं ।
यह कहना इतना आसान है ना,करना भी बड़ा आसान है दोस्त । जिस न्यूज़ीलैंड पर तुम फ़ख्र कर रहे हो,वहां के आम से लोगों ने यह करके दिखाया है । न्यूज़ीलैंड की आवाम ने हम सबको दर्द से निकलने का रास्ता दिखाया है । और हम तो गांधी और सरहदी गांधी के वक़्त यही तो कर ही रहे थे । हम ज़ख्मो की पपड़ी नोचने वाला नही बल्कि मरहम लगाने वाला बनना होगा...सुक़ून,शांति आएगी,मेरा इसपर तबतक यक़ीन रहेगा जब तक मेरी सांसे हैं और यक़ीन जानो अगर इसे लाने में हमे अभी आखरी सांस लेनी पड़े, तो मैं मुस्कुराने भर का भी वक़्त नही लेना चाहता ।
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