Monday, June 8, 2020

बिरसा मुंडा

आप सबने कंकर कंकर जोड़कर जिस मुल्क़ की बुनयाद धरी थी उसमे हम सब बहुत दिन ख़ुशी ख़ुशी जी लिए।जिस आज़ादी के लिए सलाखों में आज आपने आखरी साँस ली थी उसका पूरा मज़ा हम लोगों ने पिछले बहुत से सालों में ले लिया।
अब हमारा दिल भर गया है।अब आप सबकी कुर्बानियाँ पीले पन्नों में दीमक का इंतज़ार कर रही हैं।

हमने नए रास्ते चुन लिए हैं, उन रास्तों में कहीं आप नही हैं।होना भी नही चाहिए वरना आपका दम घुटेगा।खैर हम पागल,बोझिल,पुराने,फ़ालतू के लोगों की तरफ से श्रद्धांजलि।।नए लोग अपने नए हीरो को याद करेंगे । अभी हमारे जिस्म से पुराने ख़ून के क़तरे नही गए हैं, इसलिए याद आ गए।

देश के एक हिस्से के मज़दूर,आदिवासी और किसानों को एक करके आपने सुनहरे भारत के लिए जो क़ुर्बानी दी थी ।उसने इस मुल्क़ को बहुत सालों तक मिलजुलकर चलने की सलाहियत दी ।हम ही गलत थे,अपनी तरक्की के रास्तों में आपको भूलते गए और बढ़ते गए ।आज जब पता नही कहाँ पहुँच चुके हैं, तब हम सब आपस में बहुत बंटे, बिखरे हुए हैं ।हमारे दिलों में मोहब्बत दम तोड़ चुकी है ।अब एहसास होता है बिरसा,की आप सब क्या करके गए थे ।किस शिद्दत से सबके दिल जोड़कर जंज़ीरों से मुकाबला किया था ।इस वक़्त शिद्दत से याद आ रही है।

बचपन देखें,बेहद खूबसूरत स्कूल है,इतना आकर्षक और विशाल की उसकी कल्पनाएँ मन में हिलोरे पैदा कर रही हैं।इंग्लिश ऐसी की वारे जाऊँ।यहीं स्कूल की दहलीज़ से खूबसूरत चमकता हुआ सुनहरा भविष्य दिख रहा है।आने वाला कल जिसमे मेरी टेबल पर ब्रेड एंड बटर के साथ इंग्लिश का रुतबेदार अख़बार होगा।चार नौकर होंगे जो मुँह से निकले लफ़्ज़ को ऐसे लपकेंगे जैसे उनकी किस्मत बदलने वाली हो।यह सब किसे नही अच्छा लगता होगा।यह कल्पनाएं किसे नही ललचाएँगी।मगर जो इन सबको एक झटके में तोड़ दे।

जो सुनहरे स्कूल की शक्ल से मुँह फेर ले।जो बटर एंड ब्रेड से हाथ हटाकर धनुष थाम ले।जो अपनी भूख में दूसरों की भूख की तड़प देखे।जिसका भरा हुआ पेट,अपनों की ख़ाली थाली के तसव्वुर भर से बेचैन कर दे।जिसके गले में बिलखते बच्चों को देखकर निवाले फंसने लगे।जो अपने कमज़ोर,परेशान,बेसहारा,पिछड़े लोगों की सेवा करते करते 24 साल की मामूली उम्र में ही उस पूरे समुदाय का भगवान बन जाए।वही तो है, जिसपर आज लिखा जाएगा।जिसपर कल भी लिखा जाएगा।

सर उठाकर देखिये।रोते बिलखते नेता बहुत मिल जाएँगे।गर्दन घुमाकर कर देखिये डराने वालों की कतार लगी हुई है।एक बार दिल में झाँक कर देखिये,तब दिल कहेगा की दोस्त तुम ख़ाली हो।तुम्हारे पास कोई लीडर नही,जो दिल के ख़ौफ़ को दूर करे।जो तुम्हे डराए नही बल्कि बढ़ाए।जो तुम्हारे लिए संघर्ष करते हुए सलाखों में दम तोड़ दे।दोस्त तुम्हारे पास कोई बिरसा मुंडा नही है।

बिरतानियों के दिल में जो ख़ौफ़ बिरसा मुंडा ने भरा वोह कौन कर सकता है।आदिवासियों को जो हिम्मत दी वोह कौन कर सकता है।अपना सुनहरा कल छोड़ संघर्ष में कुर्बान बिरसा मुंडा की आज पुण्यतिथि है। आज ही जेल में आखरी सांस लेकर हमारी किस्मत के ताले को खोल दिया था । आज उनको याद करके संघर्ष सीखने का दिन है।पूरे समाज को कैसे आगे लाए,कैसे उनकी साँसों की हिफाज़त करें,सीखने का दिन है। थोड़े थोड़े बिरसा हो जाओ दोस्तों,हम सब साथ चलकर कल का बेहतरीन भारत गढ़ेंगे। अपने लोगों से बेपनाह मोहब्बत करो,बिना उनकी कमियों में फंसे,उन्हें चाहो,बिरसा की छाँव बन जाओगे । बिरसा ने अपने लोगों से प्रेम में मृत्यु चुन ली और खुशी खुशी चले गए,पहले मोहब्बत सीखो,रास्ता खुद बखुद निकलेगा । बिरसा को नमन,आज 9 जून है,बिरसा को मत भूलिएगा,वरना खुद को भूल जाइयेगा, खुद को भूलना बर्बादी है.... सलाम बिरसा
#हैशटैग #hashtag

No comments:

Post a Comment