Sunday, June 14, 2020

सुशांत आत्महत्या

यार मरने वाला मर गया । आत्महत्या,डिप्रेशन,व्यवहार,माहौल,दोस्त,बीमारी,समाज को गाली देना,दोस्तों को कठघरे में खड़ा करना,यार यह सब बन्द करो । हममें से कोई भी किसी को नही बचा सकता,सिवाए उसके,जो ख़ुद को बचाना चाहता है । 

जिन्हें लगता है, कोई बात तो उनसे करता,दिलों के हाल जानता,तो सुन लें,आपको चल कर हम हर तरह के लोग दिखाएँगे, कोई है जो बात ही नही करना चाहता तो कोई है, अपने ज़िक्र से ही नाराज़ हो जाता है । अपना अपना मिजाज़ है, आप हमसे लिख कर ले लें मृतक अगर ज़िन्दा भी होता तो अपनी परेशानी नही बतलाता । नही अच्छा लगता है दूसरों के आगे अपनी ज़िंदगी की परतें खोलते,आप बकिये खुद को क़रीबी, नही मानता होगा किसी को करीबी की कुछ कह पाए । होंगे बहुत से क़रीबी मगर नही कहा,न कहता, क्या हुआ,काहे आप सब साइकैट्रिस्ट बनने पर तुले हैं ।

अफसोस कीजिये मगर कम से कम समाज को,रिश्तों को या उन किसी को मत कठघरे में खड़े करिए,जिनको आपको लगता है कि वह रोक सकते थे,कोई नही रोक सकता,सिवाए उसके खुद के ।

हमारे बीच से रोज़ ही कोई न कोई खत्म हो रहा है, हम किसे रोक पा रहे हैं । रोक पाते तो अपने घरों में बुझती साँसों को पहले ही रोक लिया होता । बन्द कमरों की मौत क्या कोई भी मौत हम नही रोक सकते हैं,बुझ चुके दिल को हम जला नही सकते हैं, तो क्या कोसें समाज को ।

जो ज़िन्दा हैं, उनकी ही क्या हम इज़्ज़त करते हैं । अपने माँ बाप भाई बहन और रिश्तेदारों नातेदारों को बर्दाश्त नही करते हैं और चले हैं दूसरों काअकेलापन दूर करने,दूसरे को बात करके आत्महत्या से रोकने,भाई जिन्हें भी तक़लीफ़ है, जो वाक़ई चाहते हैं कि आत्महत्या रुके,वह सिर्फ ख़ुद के घर,रिश्तेदार,गली को सम्भाल लें काफी है ।

और एक बात,दिल हल्का वलका नही होता है, असल मे लोग आपके दिलों के राज़ जानना चाहते हैं । राज़ उनपर खोल दो,बस यही जुगत तो लगी है । सैकड़ो को देखा है जो सबके राज़ सुनते हैं और अलग अलग बताते रहते हैं कि देखा,वह जब परेशान था तो मेरे पास आता था । यही तमाशे से इंसान को मौत बेहतर लगती है । जिसे जीना होगा,उसका दिल जीने का कोई न कोई बहाना बना ही लेगा । 

हमेशा यही तो कहा है कि ज़िन्दा रहने का संघर्ष ही ज़िन्दगी है, संघर्ष ख़त्म, ज़िन्दगी ख़त्म । आत्महत्या के एक्सपर्ट मत बनिये,आपकी हरकतों से आजकल के न्यूज़ एंकर टाइप फील होता है,जल्दी जल्दी सब कुछ बतला देना चाहते हैं आप,बिना रुके,सबको सवालों में लेते हुए । हो सके तो बस इतना करिए कि रोज़ बेहतर दुनिया बनाने का प्रयत्न करिए,जो ज़िन्दा रह गए,उनकी ज़िंदगी आसान बनाइये,मरना हम सबको ही है । जो पहले चला गया,वह खुशनसीब है, जो बादमे जाएगा,उसे अपनी आखरी सांस तक अच्छी खुशहाल दुनिया बनाने में लगना होगा । किसी को कोसिए मत,खुद को मज़बूत कीजिये,लोगों की मदद कीजिये और एक भी ज़िन्दगी अगर संघर्ष करती नज़र आ जाए,तो उसके संघर्ष का साथ दीजिये,हो सकता है वह थोड़ा और जी जाए ।

हर मौत दर्द देती है मगर जब तक ख़ुद की मौत न आ जाए,यह दर्द तो भुगतना ही है । बस प्रेम और सहिष्णुता रखिये,उससे भी रखिये जिसे आप नापसन्द करते हों,यही काम है, कर सकिये तो ठीक,वरना कर ही क्या सकते हैं... कुछ भी नही...
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