जो शासक शासन में पुलिस पर अधिक निर्भर होगा,उसमे शासकीय गुणों का अभाव होगा ।
पुलिस पर जितना कम निर्भर होगा और दूसरे विभागों पर अधिक पकड़ होगी,वह शासक ही शासकीय गुणों का धनी होगा ।
कुछ मामलों को अगर छोड़ दें तो अधिकतर पुलिस अच्छी या बुरी नही होती है, बल्कि उसको नियंत्रित करने वाला शासक अच्छा या बुरा होता है ।
कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए तो कमज़ोर हुक़ूमत हमेशा पुलिस पर निर्भर होगी, मज़बूत हुक़ूमत हमेशा अपने दूसरे शासकीय हाथों पर निर्भर होगी ।
पुलिस शासक के शासन को सुचारू चलाने का अंतिम विकल्प होती है, यदि यह पहला विकल्प बनने लगे,तो शासक अयोग्य है । बड़ी आसानी से अयोग्य शासक उसके फैसलों से पहचाना जा सकता है, यदि फैसला लागू करने में पुलिस की ज़रूरत पड़ रही तो वह कमज़ोर शासक है और यदि बिना पुलिस के उसके फैसले लागू हो रहे,तो वह कुशल शासक है ।
शासन डराकर नही बल्कि बहलाकर किया जाता है, लाड और लाठी में हमेशा लाड बेहतर विकल्प है, लाड-प्यार से मसले हल हो जाते हैं, शासन में लाठी आवश्यक है मगर सबसे अंत में जब कोई विकल्प न रह जाए,इसे पहला ही विकल्प नही बनाना चाहिए,इसीलिए हम सड़क पर बिछी पुलिस देखकर जान लेते हैं कि हमारा हुक्मरान कमज़ोर है या मज़बूत । चौराहों पर अधिक पुलिस तो कमज़ोर हुक़ूमत,कम पुलिस तो मज़बूत हुक़ूमत बशर्ते अपराध न हो क्योंकि बिना पुलिस के भी अपराध रोका जा सकता है, यही कुशल शासन है ।
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