Wednesday, March 7, 2018

महिला दिवस

कोई कहता है की महिलाओं के लिए खास दिन की ज़रूरत क्या है और हम कहते हैं ज़रूरत है।कम से कम उस एक दिन हम हर उस महिला को एक साथ याद तो कर सकते हैं जिसने परम्पराये तोड़ी।रास्ते बनाए।खुशबू बिखेरी।अपने पसीने से चमक पैदा की,हमारी आपकी आँखे खोली।फर्क मिटाए।वक़्त आने पर लगाम थामी और नई नज़ीर बनाई।
वह औरत जब साहस में होती है तब इंदिरा बनती है।जब करुणा में होती है तब मदर टेरेसा बनती है। विज्ञान में कल्पना चावला।जब राजपाट सम्भालती है तब महारानी विक्टोरिया होती है।पर्दे में दुश्मनो के पर्दे उतारकर रज़िया सुल्ताना होती है।रानी झाँसी और बेग़म हज़रत महल बनकर दुश्मन के दांत खट्टे करती है,वो जहाँ होती है एक तारीख बुन रही होती है।जब जिस्म दिखाती है तो सनी लियोन बनती है।जब अदाकारी पर आती है तब रेखा बनती है।जब गला आवाज़ से सुर्ख़ होता है तब बेगम अख्तर बनती है।

जब व्यापार सम्भालती है तो नैना लाल क़िदवई बनती है।जब कलम थामती है तो महादेवी बनती है।इस्मत चुगताई बनकर घर घर से कहानी बटोरती है ।सावित्रीबाईफूले बनकर दासता को तोड़ती है।ज़ुलैखा बनकर मौलाना आज़ाद को कन्धा देती है तो कस्तूरबा बन गाँधी गढ़ती है।बीबी अमतुस्सलाम बन कर संगठन खड़ा करती है।आदिवासी की आवाज़ सोनी सोरी बनती है तो सबसे जूझती इरोम शर्मीला बनती है।जब अध्यात्म को थामती है तो भगिनी निवेदिता बनती है।सूफियाना होकर राबिया बसरी बनती है।रस में मीरा तो प्रेम में लैला होती है।एक धागे को दो तीलियों में बुनकर ऐसी नक़्क़ाशी उभारती है की जिस्म ढककर भी खिल उठें।सर पर ईंट लादे जब कोई औरत बहुमंज़िला इमारत में मज़दूरी करती है तो अच्छी अच्छी ताक़तों का गुरूर चटख जाता है।

कौन सी शय है जिसमे उसने बुलंदिया नहीं पाई।औरत के हर रूप को आज याद करने का दिन है।एक बार उसे आज़ाद करिये।हाथ पैरों से नहीं अपने थोपे विचारों से आज़ाद करिये तब देखिएगा वो इतने ऊपर उड़ेगी की आप फ़ख्र से भर जाएंगे।औरत का सतरूपा या हव्वा या ईव या देवी वाले रूप से छुटकारा पाइए तब देखिएगा वो कितनी बहुरंगी और प्रतिभा वाली है।उसका हर कदम हमारे आपके कदमों से मज़बूत,अडिग और तरक्की वाला है।उसकी समझ हमारी आपकी समझ से परे है।वह हर रूप में सबसे ऊपर है।ईश्वर की सबसे सफल रचना है औरत ।

और हाँ मैं नही कहता की औरतो को तुम बराबरी का स्थान दो,क्योंकि यह तुम्हारे बस में ही नही है।औरत खुद जब चाहेगी,जो चाहेगी ले लेगी,हम और आप देने की ड्रामेबाज़ी ही करते रहेंगे।हम उसे क्या ख़ाक देंगे,हम खुद उसके मोहताज हैं।इसकी एक छींट भर मोहब्बत हमारी ज़िन्दगी को खूबसूरत बना देती है, तो मांगने वाले तो हम हुए।हम सिर्फ इतना कर सकते हैं,की अपने अंदर फ़र्ज़ी गढ़ा हुआ गुरूर तोड़ सकते हैं।

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