Friday, March 9, 2018

फार्मी मुर्ग़े की योनि

जब मैं फार्मी मुर्गों को देखता हूँ तो दहल जाता हूँ की आखिर यह कौन से लोग हैं जिन्होंने एक जैसा गुनाह किया और फार्मी मुर्ग़े की शक्ल में दूसरा जन्म पाया।मैं जब उन्हें जाल में बन्द देखता हूँ,एक दूसरे के ऊपर मरिहल सी हालत में खड़ा पाता हूँ तो सोचता हूँ इस वक़्त वह कौन सा गुनह है जो हमे इस रूप में जन्म दिलवाएगा ।जब उसे तराज़ू पर झुका हुआ देखता हूँ,जबकि उसके कानों में एक की चीखें और उसकी खुद की मौत चन्द बाँटो के दरमियान होती है तो भी वह उचक कर भागने की कोशिश नही करता,यह बेबसी आखिर किस गुनाह की सज़ा के लिए मिलेगी ।

जिन्हें अगले पिछले जन्म में यक़ीन हैं, वह पोल्ट्री फॉर्म में ठसे हुए मुर्गों को देखें और सोचे की आखिर वह कौन सा समूहों में किया गया गुनाह है जो एक रँग,एक जाल,एक छूरी से एक साथ इस जन्म में मिल रहा है ।कहीं यह वियतनाम पर बम बरसाने वाले तो नही,कहीं यह तालिबानी तो नही,कहीं यह आइसिस के लोग तो नही,कहीं यह इज़राइल से तो नही,कहीं यह कुर्दों के क़ातिल तो नही,कहीं यह रशिया के ख़ूनी हाथ तो नही,कहीं यह अमरीका के नफ़रती तो नही,कहीं सीरिया म्याँमार या यहूदियों की नस्लकुशी करने वाले हिटलर के लोग तो नही ।

कहीं यह हमारे मुल्क़ के बंटवारे के वक़्त वह वहशी लोग तो नही जो हर आने जाने वालो को लूटते थे,उनकी लड़कियों को आपस में बाँटते थे और रोते हुए हर बेबस के सामने ठहाके लगाते थे,कहीं यह कश्मीरी पण्डितों,चौरासी के सिखों,गोधरा के सन्तों,गुजरात के मुसलमानो,भागलपुर के इंसानों और मुज़फ्फर नगर के बेघरों के क़ातिल के जन्म तो नही या कहीं यह वह तो नही जो आज भी दंगो में औरतों के कपड़े नोचते हैं, बच्चों को हथियारों पर टाँगकर अपनी घिनौनी ताक़त को दिखाते हैं, इंसान को मारने के वीडियो बनाते हैं, इन सबसे इतर यह फार्मी मुर्ग़े कहीं वह तो नही जो इन सारे गुनाहों पर पर्दे डालने वाले लोग हों ।
पता नही,यह फार्मी मुर्ग़े किस योनि में आते हैं, किसके हिस्से का गुनाह है जो आज इस जन्म में उन्हें सामूहिक दर्द,बेबसी और मायूसी में ढकेले है ।

क्या क्या सोच लिया,सब तो हमारा ही वहम है ।बेचारे यह मुर्ग़े तो खुद मज़लूम हैं ।न कोई अगला पिछला जन्म  ।इस वक़्त ही होना है जो होना है ।दंगो में ठहाके मारकर हँसने वाले हर खूँखार को बहुत तरक्की करते देखा है ।इसीलिए तो इसपर यक़ीन नही,बस मुर्गा खरीदिए,पकाइये और खा जाइये । मेरी तरह यूँ लफ़्ज़ की सड़क पर हैशटैग के ठेले में अल्फ़ाज़ का ढेर लगाए, रोज़ के फेरीवाले के चक्कर में मत पड़िये,एक दूसरे से लड़ते रहिये ।नोच डालिये हर वह गिरेहबान जो आपकी पसन्द का नही है, आखिर इंसानियत को खत्म करने का ठेका भी तो उठाया ही गया है...

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