Saturday, August 4, 2018

नील आर्मसट्रोंग

"Houston, Tranquility Base Here. The Eagle has landed.”
यह वह लफ़्ज़ हैं जिन्होंने तमाम किस्से कहानियों को तोड़ दिया।उन दुकानों को कमज़ोर कर दिया जो धर्म की आड़ में चल रही थीं।यह लफ़्ज़ जब गुँजे तो यक़ीन हो गया की वह कोई और नही,हमारे जैसा ही एक गोला है।उस गोले का इस गोले से सिर्फ यह फ़र्क़ है की यहाँ हम हैं और वहाँ हम नही हैं।

ऊपर की लिखे यह वोह लफ़्ज़ हैं, जो सबसे पहले चाँद पर पहुँचकर पृथ्वी पर भेजे गए।ज़मीन ने यूँ तो चाँद के बहुत से किस्से सुने थे मगर 20 जुलाई को वह पहला दिन था जब ज़मीन पर पला बढ़ा कोई इंसान चाँद पर पाँव धरकर,अपने पहुँचने की इत्तेला धरती को देता है।

यह नील आर्मस्ट्रांग का सन्देश था।अब आप कहेंगे इन्हें काहे खींच लाए यहाँ। जब बात सियासत की हो,समाज के संवेदनशील किस्से हों, साहित्य के चटखारे हों तो नील आर्मस्ट्रांग का दामन पकड़ काहे खींचे ला रहे हो।तो यह जान लें की आज उनका जन्मदिन है।चाँद देखकर सब कुछ तय करने वालों को भी आज यह याद रखना चाहिए की नील ने बतला दिया था की चाँद महबूबा का न तो माथा है और न बच्चों का मामा, हाँ अगर रिश्तों से ही हर अहमियत तलाशनी है तो बात अलग,वरना थोड़ी मेहनत के बाद चाँद भी हमे पनह देने को तैयार हो सकता है।

खैर बचपन में उड़ते जहाज़ देखने वाले और बाप की ऊँगली थाम जहाज़ों की कलाबाजियों पर खिलखिलाकर हँसने वाले नील कब उड़ने लगेंगे किसने सोचा था।पन्द्रह साल की मामूली उम्र में पायलट बनकर यह तो दस्तक दे ही दी थी की उनकी ऊंचाई का कोई अंदाज़ा नही लगा सकता ।नील का मिजाज़ लाजवाब।सबके दोस्त,ज़बान मासूम,मोहब्बत और इंसानियत की मिसाल।वाक़ई बेहद नरम मिजाज़ और सबको साथ लेकर चलने की कला।न किसी से प्रतियोगिता और न बुराई बस अपने मकसद में चलते चले जाना।
सोचिये जब चाँद पर पाँव धरकर लौटे तो लोग उनके लम्बे लम्बे भाषणों का इंतज़ार कर रहे थे ।होता भी तो यही था,मगर नील ने अपनी क़ाबलियत को मासूमियत में लपेट कर सिर्फ इतना कहा..

That’s one small step for man, one giant leap for mankind.” ('एक आदमी का छोटा क़दम, मानवता के लिए बड़ी छलांग') और चल पड़े अगले सफ़र की तरफ।।।आज नील का जन्मदिन है, हमे तो यह हमेशा आकर्षित करते रहे,खासकर तब जब जब पूरा चाँद आसमान से झाँकता है।मुझे उसपर नील का पाँव नज़र आता है।हो सके तो नील को देखकर वैज्ञानिक सोच पैदा कीजिये वरना जो माहौल है वह तो हम सबको विज्ञानं से बहुत बहुत दूर ले जा रहा है ।हो सके तो आपस में धर्म के नामपर ख़ून खराबे से ज़्यादा विज्ञान की चिंता कीजिये ।यही से नस्ले सुधरेंगी और खुश होंगी ।विज्ञान ही विकास है बाकि सब भरम है ।नील की तरह बड़े दिल का इंसान बनिए,नील को बहुत सी मोहब्बत आज...

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