Wednesday, September 18, 2019

कश्मीर और राजनीति

कश्मीर में 15-20 दिन पहले भी कर्फ्यू हटाया जा सकता था,तमाम चीज़े सामान्य की जा सकती थीं । कश्मीर में विरोध प्रदर्शन तो होते ही,यह चाहे आप 5 साल बाद भी हटाइये,विरोध तो होगा ही,पूरे देश मे कोई भी राज्य के साथ ऐसा किया जाता,तो वह भी विरोध करता ही । ज़बरदस्ती के हर काम का विरोध तो होता ही है, कुछ वक़्त, तो वहाँ भी होता,इसमे नया कुछ भी नही ।

मगर हां मगर सुनिए,अगर वह इस कर्फ्यू और वास्तविक इमरजेंसी को 15-20 दिन पहले हटाते तो,उसका विरोध होकर अब तक सामान्य हो चुका होता । कश्मीर छोड़कर यह अबतक शेष भारत मे इश्यू ही न रहता मगर वोट की बारिश सूंघ लेने वाले लोगों के लिए यह इतना सामान्य नही है । वह यह कर्फ्यू और  बन्द के हर तरीके करीब 25 से 30 दिन और खीचेंगे ।

अक्टूबर के आख़री तक कर्फ्यू हटाया जाएगा ताकि कश्मीर में भयँकर विरोध प्रदर्शन हों और यह एक बार भयँकर गर्मागर्म मुद्दा बनकर हरियाणा,झारखंड और महाराष्ट्र की वैतरणी पार लगाए ।

ज़ाहिर है जब कर्फ्यू हटेगा,तो विरोध प्रदर्शन तो होंगे ही,उसमे कुछ बयान उछलेंगे । हर बयान जो कश्मीर के समर्थन में होगा,वह पूरे देश के विरोध में दिखाया जाएगा । टुकड़े टुकड़े गैंग टाइप खेल चलेगा । मीडिया, काँग्रेस को,भले ही कांग्रेस कोई भी स्टैंड ले,देश विरोधी आवाज़ बनाकर गर्मागर्म परोसेगा और कांग्रेस के विरुद्ध सैलाब की तरह वोट गिरेंगे ।

ज़ाहिर है इस वक़्त देश मे घोर राजनैतिक व्यक्ति शक्तिशाली रूप से विराजमान हैं । उनका हर कदम राजनीति से ही प्रेरित है । यह बात हर एक वोटर जानता है मगर दिल से मजबूर हैं । राजनीति के लिए अगर एक पूरा प्रदेश चारा बन जाए तोभी क्या,उन्हें मंजूर है ।

जब मैं यह कह रहा हूँ,तब समझ लो मैं सौ फीसद राजनीतिक सोच रखकर कह रहा हूँ । मैं कश्मीर को पूरे देश की राजनीति के लिए चारा बनते देख रहा हूँ । लाखों लोगों की कैद जिंदगियां,लाखों वोटों में बदलते देख रहा हूँ । यहाँ संवेदना की बात बेईमानी है, हमे मत सिखायेगा की सरकार राजनीति नही कर रही है । कोई मूर्ख ही कहेगा कि यह सत्ता पाने से प्रेरित एक घोर राजनैतिक कदम नही है ।

कश्मीर तो तीन राज्यों में रोजगार,भ्र्ष्टाचार, व्यभिचार,कानून व्यवस्था और डूबते अर्थतंत्र की वैतरणी पार लगाएगा । कश्मीर जितना तड़पेगा,उतना वोट बरसेगा,वह भी खुशी खुशी,क्योंकि हम सबने दूसरे के दुखों पर खुशियां मनाना सीख लिया है । याद है, नोटबन्दी में लाइन लगे,हैरान परेशान,मरते हुए लोग,फंदे पर लटकते हुए किसान,फटे कपड़ों में मिली लड़कियों की लाशें ,अस्पतालों में मरते हुए बच्चे,सब के बावजूद हमने पूरे गर्व से चुना है,चुनेंगे क्योंकि हम देश नही,देश के लोग नही बल्कि धर्म बचाने निकले आधुनिक नौजवानों की भीड़ हैं....

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