Friday, September 20, 2019

मुझे बेचना न आया

एक दोस्त ने कहा कि हफ़ीज़ तुममे बिल्कुल भी मार्केटिंग स्किल नही है । मैं हँसा और बोला तुम्हे मेरी खूबी क्या पता ।
मैं रेगिस्तान में भयँकर प्यासे किसी सौदागर को पानी,नरेंद्र मोदी के प्रेम में तड़पते हुए भक्त को नमो की जीवनी,पोर्न एडिक्ट को सनी लियोनी की बिल्कुल नई सीरीज़, किसी मुसंघी को शरई हुक़ूमत कैसे आए वाली किताब,संघी को हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के मंत्र,सचिन तेंदुलकर को मंगल ग्रह में पहुँचने पर बैट, पेले को सालों फुटबॉल न देख पाने पर फुटबॉल, सर में पलते जुओं से परेशान किसी को कंघी भी बेच पाने का हुनर मुझमे रत्ती भर नही है ।

मैं दुनिया का वह बन्दा हूँ जो कुछ भी, किसी को बेच नही सकता । मार्केटिंग में तो हमे लगता है कोई हमसे पहले कंघे,ब्रश और चूहे मार दवा बिक़वाए, हमे तो लगता है, चूहे मार हमे खुद खानी पड़ेगी तब भी हमसे यह भी नही बिकेगी ।

जब मुझे कोई अपनी किताब,अपने प्रोडक्ट या अपने आप को ही बेचता हुआ दिखाई देता है, तो मैं शर्म सेगहरे गड्ढे में गड़ जाता हूँ। मुझे मार्केटिंग में उस्ताद यह बन्दे देखकर बेहद खुशी होती है । प्रार्थना करता हूँ कि ईश्वर हमे भी यह गुड़ दे दो,वरना गुड़ गोबर तो सब है ही....

मार्केटिंग,इसकी जय बोलो,जिसे ना आई,उसे कौन जाना,जिसे आई, उसके सिवा किसे जाना गया । मैं एक यह गुर सीखना चाहता तो हूँ मगर अपनी कंचे से छोटी बुद्धि देख रूक जाता हूँ,एक गुरु का इंतेज़ार है, जो हमे बेचना सिखा दे...वरना हम बांटते ही रहेंगे,क्योंकि बाँटना ही आया है, रेवड़ी,खुटिया, जलेबी और विचार सब बांट देंगे,बिना झगड़े और पक्षपात के,बस बेच नही पाते,न खुद को,न खुद का...बेचना एक महत्वपूर्ण,महान गुड़ है, जिस दिन आ गया,उस दिन हम हम नही रहेंगे...

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