Sunday, March 29, 2020

कोरोना की कहानी

कोरोना : यार तुम पैदल क्यों भागे चले जा रहे हो ? मैं तो साबुन से हाथ धोने से ही मर जाता हूँ,थोड़ा मुझसे दूर बैठो तो मैं तुम्हे छू भी नहीं पाऊँगा, फिर भी क्यों भाग रहे हो मित्र ?

इंसान : भूख से,तुम आकर भी जीवन नही ले पाओगे मगर भूख प्राण खींचे बिना नही जाएगी ।

कोरोना : यार भूख भी 14 दिन तक तुम्हारे प्राण हर नही पाएगी । तब काहें भाग रहे हो ?

इंसान : काम से,14 दिन तक भूख से तो लड़ सकता हूँ मगर बताओ,उसके बाद इस जर्जर निशक्त शरीर से कौन काम लेगा । जब स्वस्थ शरीर काम के लायक नही तो 14 दिन भूख से लड़ते शरीर को काम की क्या ही गारंटी,इसलिए जा रहा हूँ 

कोरोना: जाओ,ईश्वर से प्रार्थना की अगर मैं तुम्हारे मार्ग में कभी आ भी जाऊं, तो तुम्हारे पाँव के छाले के नीचे दबकर वीरगति को प्राप्त होऊं ।

इंसान : ए कोरोना,तुम परेशान मत हो,इस शरीर ने बहुत कुछ देखा है । हम व्यवस्था के शिकार हैं, यह हमारे जीवन का हिस्सा है,एक अदद साँस के लिए भागो,भागो और भागो । तब तक भागते रहो, जब तक मर न जाओ,मरने से बचने के लिए भागो,ए कोरोना,यार हम गोल गोल घूम रहें, यही तो हमारा भाग्य है और यही है हमारी खोज शून्य ।
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