छिपकली ने लपककर अधजली छिपकली को पकड़ा और मायूस अंदाज़ में पूछा,बहन बच्चे कैसे हैं । अधजली छिपकली ने आह भरी और कहा बच्चे ! बच्चे तो इंसान की नज़र हो गए । हम दीवार पर टँगी इंसान के पुरखों की तस्वीर के पीछे खुशहाल से रह रहे थे ।
रोज़ अपने बच्चों को दीवार में टँगी घड़ी तक टहलाने ले जाते,अक्सर इधर उधर जाने में कोई घर का इंसान हमे देख चीख उठता,हम डरते और लपक कर किसी झरोखे में छिप जाया करते थे । इंसान से यह लुका छिपी ही हमारी ज़िंदगी के मज़े थे । हम बच्चों को दिखाते की देखो एक ही कमरे में,एक ही बिस्तर पर दो इंसान कितना झगड़ते हैं और कितनी मोहब्बत भी करते हैं ।
फिर एक रोज़ कुछ इंसानों की भीड़ आई, वह बाहर चीखी,घर मे मौजूद इंसान को हमने डरते हुए छिपता देखा । छिपे हुए इंसान को दूसरे इंसान हमारे सामने ही घसीट कर ले गए। एक इंसान ने दूसरे इंसान को नोच नोच कर मार डाला,मारने के बाद खाया भी नही,जब खाना नही था,तब मारा ही क्यों और फिर इंसान समेत पूरे घर में आग लगा दी ।
आग लगी,तो इंसान चीख चीख कर जला,उसकी खाल उन दीवारों में चिपक गई,जो हमारे टहलने की जगह हुआ करती थी,इंसान भरभरा कर जला, घर का साज ओ सामान जला,गर्मी से दीवारें चिटखने लगी और हम और हमारे बच्चे इस तस्वीर से उस तस्वीर में छिपने को भागते रहे । कभी रॉड,कभी घड़ी तो कभी पँखे की दराज़ में छिपे मगर सब जगह आग ने लेली,हम हंसते खेलते घर को भरभरा कर जलता देख दहल गए और इसे छोड़ते की उससे पहले इंसान की लगाई लपटों ने हमारी ज़िंदगी को अपने हाथों में ले लिया । मेरे सभी बच्चे और कुनबे के लोग और साथी इंसान की लगाई आग में झुलस कर खत्म हो गए ।
जली हुई छिपकली ने रुँधे गले से कहा कि यह मनहूस इंसान आपस मे लड़ते क्यों हैं । इन कम्बख्तों को यह नही पता कि इनके लड़ने से हमारी जान पर बन आती है । यह आग लगाते हैं और बच्चे हमारे जल मरते हैं । इन इंसानों से तो हम छिपकली बेहतर हैं कि आपस मे भले ही कितना लड़ें मगर कभी किसी छिपकली की रिहाइश नही जलाते,कभी दूसरी छिपकली के बच्चों को निशाना नही बनाते,हम सब कितना ही लड़ लें मगर इंसान की ज़िंदगी मे ज़रा भी ज़हर की छींट नही पड़ने देते,हम छिपकलियों की लड़ाई से कभी भी तीसरी छिपकली को दर्द नही देते । एक जैसी सूरत वाले यह इंसान इतने बंटे हुए ज़हरीले हैं, इनके बीच रहना ही नही चाहिए था । हमे देखकर इंसान चीखता था जबकि इंसान को देखकर हम सबको चीखना चाहिये था,अधजली छिपकली यह कहती कहती दुनिया से रुखसत हो,अपने बच्चों से जा मिली...
#hashtag #हैशटैग
No comments:
Post a Comment