हमने बचपन में बहुत गिद्ध देखे,देखते देखते गिद्ध ख़त्म भी हो गए । अब समझ आया,वह खत्म नही हुए,बल्कि कुछ इंसानों में बदल गए और डांगर की जगह इंसान को ही खाने लग गए ।
गिद्ध मरे जानवर खाते थे,यह नए गिद्ध हिन्दू मुसलमान के बीच नफरत फैलाकर ज़िन्दा इंसान खाने लगे हैं । गिद्ध कोसों मीलों दूर से डांगर खोज लिया करते थे,यह नए गिद्ध भी कोसों मीलों दूर से मुद्दे ढूंढ ही लाते हैं, जिससे इन्हें भोजन मिल सके ।
नए गिद्धों का जो भोजन है अगर वह ज़रा भी समझदार हो तो अपनी कमज़ोरियों को दूर करे और परेशान मत हो,बस इंसानियत के लिए लगे । ख़ुद को निखारें, गलतियों को सुधारें और निरन्तर अपने पर काम करें बिना कान धरे । एक दिन यह गिद्ध भी बदलकर कोई और जीव हो जाएँगे और मानवता से खतरा मिट जाएगा ।
बस खुद की गलतियों,कमियों को सुनो और धैर्य से सुधार करो,आलोचनाएं सृजन का पथ बनाती हैं । जो आलोचना में नफरत भी गूंथे दे रहें,उनकी तरफ ध्यान ही मत दो,बस ख़ुद पर मेहनत करो,मेहनत का कोई तोड़ नही,डरो मत,विचलित मत हो,जवाब मत दो,खुद को सुधारो और देश-मानवता के लिए सोचो,बस,सेवा करो,सेवा करते करते मर भी जाओ,तो ग़म मत करो । चीज़ें सुधरेंगी,हमारा देश बड़ा ही खूबसूरत है,इसकी खूबसूरती बरक़रार रखने और बढ़ाने में जूटो, गिद्धों पर से ध्यान हटाओ।
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