Sunday, March 22, 2020

भविष्य में कोरोना

"अल्लाह का अज़ाब है और रहो ईमान से दूर । सोचो एक न दिखने वाली चीज़ से तुम अशरफ़ुल मख़लूक़ात को घर बैठा दिया । एक से एक क़ाबिल, ताक़तवर,सूरमा सब उस न दिखने वाली मख़लूक़ के सामने झुक गए । यही तो है, जब तुम ईमान से डिगोगे तो तुम्हे लाइन पर लाने का इंतज़ाम खुदा ने कर ही रखा है, सम्भल जाओ की उससे पहले मिट जाओ,मज़हब की डोर थाम लो भाई,यह अल्लाह की तरफ से दस्तक है, सुनो और ईमान पर लौटो । "

"तुमने मांसाहार अपनाया,अधर्म को सर पर चढ़ने दिया,कुकर्म को अपनाया तो भगवान ने उससे जो तुम्हे नंगी आँखों से न दिखे,तुम्हे घरों में क़ैद कर दिया । तुमने शँख से दूरी की,शँख तुम्हारी आवश्यकता हो गई । तुमने धार्मिक कर्मकांड छोड़े, उसमे तुम्हारे जीवन के सूत्र थे,भगवान ने एक झटके में तुम्हे याद दिला दिया । तुमने भगवान से मुँह मोड़ा,भक्ति से किनारा किया,भगवान ने तुम्हे एक चुटकी में अपनी शक्ति का आभास करा दिया । अब वक्त है, धर्म को मजबूती से पकड़ लो,अधर्म के नाश के लिए निकलो, धर्म की शिक्षा को मानो उससे पहले की मिट जाओ ।"

दोनों कथाएँ पढ़ लीजिये,भविष्य में यह कानों में गूँजेंगी । कोरोना से तो बच जाएँगे मगर इस रोने से नही बच पाएँगे । आपको लगता है मंदिर,मस्जिद,चर्च आज बन्द हैं और अस्पताल खुले हैं । कल फिर अस्पताल इसी हालत में रहेंगे और जिनमे आज ताला लगा है, वह चमक बिखेर रहे होंगे । इन लगे तालों में डराने का मैटेरियल तैयार हो रहा,जो जितना डरा ले जाएगा,उसके धर्म मे उतनी लम्बी लाइन लगेगी। जो कोरोना से आज डर रहे हैं, कल वह कोरोना से डराएंगे । आज जो वायरस से छिप रहे हैं, कल वह वायरस का डर लेकर अपनी भीड़ बढ़ाएंगे । दोस्त यह धर्म नही,धर्म का व्यापार है, विपत्ति व्यापार को लाभ देकर जाती है, आज नही तो कल ।

हमारा क्या,हम तो हमेशा कहते हैं कि दुनिया धर्म से खाली नही हो सकती । धर्म से भागो मत,उसे काबू में लो । जादू से डरना नही चाहिए,उसे सीखना चाहिए,मज़ेदार होता है जादू ।
कोरोना तो आज नही कल निपट जाएगा । बस सभी धर्मों के सेलिबस में शामिल हो जाएगा,डरो,उससे पहले ईश्वर तुम्हे और सबक सिखाए...आख़री बात घर मे रहो । अब तो इस पूरे जीवन कोरोना का रोना तो चलेगा ही....कोरोना वायरस से नही बल्कि ऊपर बताए प्रवचन से....
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