इस्लामी महीना रबीउल अव्वल का आगाज़ हो गया है । यह महीना पैगम्बर हज़रत मोहम्मद की दुनिया में ली साँसों के हिसाब की शिनाख्त का महीना है । जब हम लोग ठीक मुसलमान नही हुए थे,जब हम लोगों को कपड़े और दाढ़ी टोपी की जगह किरदार की शिनाख्त की तरबियत दी जाती थी,तब यह महीना हमारे घरों की ज़ीनत होता था ।
घर घर महीने की शुरुआत से ही रोज़ मीलाद होती थी । जिनमें पैगम्बर हज़रत मोहम्मद का दुनिया मे आना, दुनिया को समझना,दुनिया से सीखना और दुनिया को सिखाना और किरदार को तराशना घर घर मे सुनाया जाता था । यह खलिस ऐसा तरीका था जिससे कोई भी अपने पैग़म्बर के किरदार को समझ लेता,बच्चे और बूढ़े खुद को तरबियत दे लेते मगर फिर हमने तरक्की कर ली । फिर हम पढ़े लिखे मुसलमान हो गए और फिर यह फ़ालतू की रवायतों को घरों के जंग लगे सन्दूक में समेट कर रख दिया और एक रोज़ पुरानी छत ढह गई,उसमे सन्दूक समेत खूबसूरत रवायतें दबकर खत्म हो गई ।
मैं इस्लामी नुक्ते नज़र पर उंगली नही चलाना चाहता,मैं तो बस इस महीने की आमद पर बचपन के उन दिनों को याद कर रहा हूँ,जब तख्त पर मेरी नानी बैठी कुछ पढ़ती थीं और हम खीर खाने के ख्वाब देखते हुए,उनके पढ़ने को सुना करते थे । जब सुनकर उठते थे तो ज़ुबान पर खीर होती थी और ज़हन में शानदार तारीख़ दर्ज ही जाती थी । आज भी हमें मोहम्मद साहब का जीवन चरित्र पढ़ने की ज़रूरत नही पड़ी,क्योंकि हर करवट को सुनकर बड़े हुए हैं ।
मीलाद मेरे लिए वर्कशॉप थीं,ख़ैर इस महीने हम कोशिश करेंगे कि हज़रत मोहम्मद की ज़िन्दगी के तमाम बदलाव आपतक ला सकें । रेत में मोहब्बत की तस्वीर उकेर सकें । यह पूरा महीना उनके ज़िक्र का महीना है, हमें वह लोग ज्ञान न दें जो कहते हैं कि रोज़ ही उनके ज़िक्र के दिन हैं । कोई किसी का भी रोज़ ज़िक्र नही कर सकता अगर करता है तो वह इस दुनिया से हट चुका होता है, इसलिए आम लोगों के लिए खास दिन,खास महीने हमेशा बहुत खास ज़िक्र के रहेंगे ।
हम यहाँ इरके फिरके वाले ज़हन के कंगाल लोगों का ज़िक्र भी नही करते हैं । मेरा मानना है, हज़रत मोहम्मद एक वैश्विक चरित्र हैं । उनपर पूरी दुनिया का अधिकार है । उन्हें जैसे चाहे याद करे,यह कोई कुंद ज़हन नही तय करेगा । जिस तरह दुनिया को रोशनी देने वाली हर पर्सिनोलिटी से हम बेहतर चीज़े लेते हैं, मोहम्मद साहब से भी लेंगे,उन्हें केवल एक धर्म या एक क़ौम या एक फिरके या एक मुल्क की सीमाओं में कैद करना, उनके साथ ज़ुल्म है ।
रबीउल अव्वल की सभी को मुबारकबाद । हज़रत मोहम्मद की तबियत से ज़िक्र के महीने की मुबारकबाद । रौशनी का ज़मीन पर आना मुबारक....पैगम्बर हज़रत मोहम्मद पर बात कीजिये,मोहब्बत कीजिये,मोहब्बत ही मोहम्मद हैं, इससे डिगकर उनके नही रहोगे,इसलिए कोई भी तरीका अपनाओ,इकट्ठे हो और उनकी बात करो,भले ही वह मीलाद हो या कुछ और,ज़िक्र के रास्ते खोलो,ज़िक्र को रोको मत....
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