हम अब इतने हल्के समाज मे तब्दील हो चुके हैं कि बुराई जब तक लिख न दी जाए,तब तक उसे बुराई नही अच्छाई माना जाता है । अरे भाई कोई लिखे या न लिखे,बोले या न बोले हत्या,झूठ,अन्याय यह सब अपराध में ही गिना जाएगा,इसे हमारी आपकी स्वीकृति की आवश्यकता नही है ।
एक अपराधी लड़के ने एक लड़की की हत्या कर दी,बहाना कथित प्रेम को बनाया गया । हत्या तो अपराध है ही,प्रेम को बहाना लेकर हत्या तो धूर्तता और अपराध का मिश्रण है । अब बताइये,इसे कौन इंसान सही ठहराएगा । कोई भी सभ्य इंसान हत्याओं को सही नही ठहरा सकता ।
अब आते हैं भत्सर्ना पर,जो खुद दिल के चोर होते हैं, वह इधर उधर झाँकते फिरते हैं कि किसने विरोध किया और किसने नही किया । चलो ऐसे लोगों को घेरा जाए । यह दिमाग से इतने दरिद्र होते हैं कि इन्हें यह भी नही पता कि कोई भी इंसान,जिसकी चेतना और विवेक,किसी दूसरे के पास गिरवी नही है, वह कभी भी हत्या,बलात्कार,हिंसा को सही नही ठहरा सकता है, वह तो हमेशा उसके खिलाफ ही होगा,भले वह लिखे या न लिखे ।बोले या न बोले ।
एक चीज़ की गिरह बाँध लें,हत्या,हिंसा,बलात्कार या कोई भी मानवता के विरुद्ध अपराध में हर इंसान इसके खिलाफ रहता है । इसपर शक वही करेगा,जो कभी न कभी ऐसे अपराधों को मौन स्वीकृति दे चुका होता है, तब उसे अपनी तरह सारा संसार मक्कार ही नज़र आता है, जबकि बाहर निकलकर किसी एक से पूछ लो,वह यही कहेगा कि यह बुरा है, बहुत बुरा है, बचो इससे ।
जब जब घटनाओं में हम जाति, धर्म,वर्ग,क्षेत्र का छौंका लगाते हैं, तब हम असल मे अपनी क्रूर मानसिकता को अपराध में घोलकर पीड़ित इंसान के साथ अन्याय कर रहे होते हैं । एक अपराध हुआ है, उसकी सजा मिलनी चाहिए,यह एक शास्वत सत्य है, बाकी इसमे जितने मसाले डाले जाएँ,वह भी इस सत्य को झुठला नही सकते हैं ।
अपराध में लिप्त अपराधी,वह कोई भी हो,उसे सजा मिले, न्याय की प्रक्रिया सरल और जल्द पूरी हो,यही पीड़ित के साथ न्याय है, बाकी अपने घरों के लड़कों को समझाइए की हिंसा दीमक है, जो उनके पूरे कुनबे को खा जाएगी, फिर वह भला कोई भी हो । हिंसा,नफ़रत,हत्या हर उस घर मे विराजेगा जहां अन्याय को स्थान दिया जाएगा । इससे बचिए,यह हम सबके लिए ज़रूरी है ।
किसी की भत्सर्ना का इंतेज़ार मत कीजिये,समाज को संभालने और सुधारने निकलिए । बच्चों पर ध्यान दीजिए,उनमें सरलता, प्रेम,त्याग और समर्पण के मूल तत्व पिरोए वरना कोई दिन आपकी चौखट से कोई किसी को अपने अहंकार में निगल जाएगा । अपने बच्चों को बचा लीजिये,उन्हें इंसानों जैसा बर्ताव करना सिखाइये और बताइये,अपराध की नियति दण्ड है, इससे कोई नही बचेगा,कोई भी नही । देश के कानून पर भरोसा रखिये, अपराधी के समर्थन में खड़ा होना,खुद को अपराधी बनाना है, यह बच्चों को सिखाइये ।
उस बेटी को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि,देश के संविधान और कोर्ट से उम्मीद है कि अपराधी को बहुत जल्द उसके किये की सज़ा मिल जाएगी । हमें भी आगे बढ़कर ऐसे अपराधी को अपने घरों में न पैदा होने देने के लिए सजग होना होगा ।
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