Monday, October 26, 2020

गाँधी

जब उस्ताद जाग रहा होता है, तब शागिर्द को नीम गहरी नींद ले लेनी चाहिए,क्योंकि जब उस्ताद पाँव ज़मीन पर रखेगा,तो उसकी पहली थाप शागिर्द को ही महसूस करनी होगी और फिर उस शागिर्द को जागते हुए उस्ताद के बुने ख्वाब को पूरा करने के लिए आखरी सांस तक जगना ही होगा ।

गाँधी से मोहब्बत है, इसलिए नही की वह बड़े राजनैतिक कार्यकर्ता थे बल्कि इसलिए कि उन्होंने जिसे छुआ,उसमें खुद को डाल दिया । लोग जैसे थे,वैसे स्वीकारा, फिर जैसा चाहा, वैसा बनाया । गाँधी एक शानदार प्रयोगशाला थे,जहाँ इंसानों को इंसान बनाने की प्रक्रिया चलती थीं ।

गाँधी ने बताया नफरत का विकल्प और अधिक नफरत नही है, बल्कि प्रेम है । झूठ का विकल्प और अधिक झूठ नही बल्कि सच है । मक्कारी का विकल्प और अधिक धूर्तता नही है, बल्कि सरलता है । एक दिन ज़मीन थककर मानेगी की झूठ के सामने सच ही टिकेगा,नफरत के सामने प्रेम...
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