Wednesday, October 14, 2020

कलाम की सालगिरह

डॉक्टर अब्दुल कलाम एक औसत व्यक्ति थे । उनसे अच्छे अच्छे क़ाबिल वैज्ञानिक हुए हैं । उन्हें ज़बरदस्ती सर पर चढ़ाया जाता रहा है । वह ओवररेटेड हैं । धर्म के मामले में वह खाली थे । डॉक्टर कलाम को जबरदस्ती इतने ऊँचे स्थान पर बैठाया जाता है जबकि वह इसके बराबर के थे भी नही,सैकड़ो कहानियाँ हैं, जो बताती हैं कि यह चरित्र केवल गढ़ा गया है, बुद्धिजीवीयों में उनकी गड़ना बहुत कमज़ोर है । 

यह बातें हमारे इर्द गिर्द अक्सर घूमती रहती हैं । लोग कलाम की चर्चा होने से उनमें कीड़े निकालते हैं और चर्चा न होने में भी कीड़े ही निकालेंगे । कुछ लोग मक्खी सिफत के होते हैं, गन्दगी ढूंढकर उसपर ही बैठते हैं । ऐसे ही लोग कलाम में कमियां ढूंढते हैं, फिर उसे अपने पैरों से दूसरे घरों तक फैलाते फिरते हैं ।

कलाम के वैज्ञानिक पक्ष पर हम नही जाते,न ही राजनीति की परत को खोलेंगे,हम सिर्फ इतना कहेंगे कि जिस एकता और भाईचारे की बातें हम।सब करते नही थकते हैं, क्या उसकी जीती जागती मिसाल नही थे डॉ अब्दुल कलाम । एक ही जिस्म में सभी धर्मों के मूल को समेटे सादी ज़िन्दगी नही गुज़ार रहे थे कलाम । जाओ और कोई ऐसा किरदार इतनी ऊँचाई पर बैठा ढूंढकर लाओ,जिसकी ज़ुबान,दिल,किरदार और काम में यकसा चाल हो । जिसमें प्रेम हो,जिसमे समर्पण हो,जो सिर्फ जोड़ने के लिए जाना जाता हो,जिसके रहने से कोई भी खतरा न महसूस करे,जिसके जाने से उस सड़क पर हमेशा हमेशा के लिए सन्नाटा हो जाए ।

आज डॉक्टर अब्दुल कलाम का जन्मदिन है । रामेश्वरम से उठे और रामेश्वरम में ही सो चुकी इस शख्सियत के बीच के हिस्से को दुनिया हमेशा याद रखेगी । कोई उनकी आलोचना में किताबें भर दे या कोई भी उनकी तारीफ में लाइब्रेरी भर दे,दोनों उनके नज़दीक बेकार हैं तबतक,जब तक उनके खुद के किरदार में यह लिखा पढ़ा झलके न । डॉ कलाम किरदार से मज़बूत इंसान थे । राम और अल्लाह को एक ज़ुबान पर ही नही बल्कि एक दिल मे बसाने वाले व्यक्ति थे । कृष्ण और खुसरू को अपनी धड़कन में पिरोने जानते थे और दुनिया की सबसे मासूम क़ौम में भरपूर जगह रखते थे । यह क़ौम थे,बच्चे । बच्चे जिसे मोहब्बत करने लगे,बच्चों को जो मोहब्बत करने लगे,समझ लो कि अबयहाँ मक्कारी नही बल्कि हृदय की पवित्रता का जादू चलेगा ।

मैं अपनी मुलाकातों का ज़िक्र नही करता हूँ मगर यह अनुभव ज़रूर बता सकता हूँ कि आजतक मिली हर शख्सियत से उनका मिलना सबसे अलहदा और सबसे पवित्र था । आज उनका जन्मदिन है, सिर्फ इसलिए लिख रहें कि जिस चश्मे से उन्हें देखिएगा,उसी चश्मे से हर उसको देखिएगा,जिसे आप मानते हैं । अगर राजनीति में कोई डा कलाम से बीस होगा तो सरलता में सत्तरह ही होगा, कोई विज्ञान में बीस होगा तो सच्चाई में अठ्ठारह ही होगा । कलाम हो सकता है हर ओर अठ्ठारह ही हों मगर जिधर हैं, तो उधर मज़बूत हैं ।

मैं हमेशा उसे ही लीडर मानता हूँ जो बहुत सारे विषयों में दखल रखता हो,जो बहुत तरह के काम कर सकता हो,जिसकी आंखों में घोड़े वाली पट्टी न बंधी हो, जो उसे एक ही दिशा में दौड़ाए,मेरा लीडर हर दिशा में दौड़ने वाला होगा, भले वह सेकंड या थर्ड आए मगर उसकी मौजूदगी हर ओर हो और ऐसी खूबी वाले डॉ कलाम ही वह आखरी व्यक्ति थे,जिनसे हमने हाथ मिलाया था । इंतेज़ार है कि कोई तो आए, जो बैठे तो विषय की बाध्यता न रहकर उसका वजूद बोलता रहे,कलाम ऐसी ही भरपूर शख्सियत थे ।

 आजकल तो आप बहुत बहुत याद आते हैं, जब जब प्रेम कमज़ोर होगा, कलाम की ज़रूरत बढ़ती ही चली जाएगी,कलाम प्रेम में ज़िन्दा रहते हैं और प्रेम के खत्म होने पर प्रेम को लाने के लिए उठ खड़े होते हैं,कलाम मरा नही करते हैं....
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