Sunday, January 7, 2018

मैं ख़ुदा हूँ!

ऐ तुम कौन हो
मैं ख़ुदा हूँ
क्या बकते हो
सच तो कह रहा
एक मामूली से राईटर हो और यह बदतमीज़ी
तभी तो कह रहा हूँ की ख़ुदा हूँ
अपने मुँह से यह अज़ीम।लफ़्ज़ मत निकालो,बदबख्त
अरे,तुम्हारे ख़ुदा ने एक क़ायनात बनाई,मैं उनकी क़ायनात में रोज़ नई क़ायनात बनाता हूँ,उनमे सजर  डालता हूँ।उन शजर के किरदार से तुम्हारे बनाए ख़ुदा की शजर रोती है, हँसती है, मुस्कुराती है।मेरी कहानियाँ क्या किसी दुनिया के बनने बिखरने से कम हैं, मैं मंटो के वसीले का ख़ुदा हूँ।मान लो ऐ इंसान।
बदबख्त दफ़ा हो जाओ,और उसने मुँह मोड़ लिया।

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