घर लौटते वक़्त उसे लगा उसके दांत में कुछ फंसा है। वह नीम की सूखी सींक से दांत खोदता हुआ लौटता है। पता नही क्या फंसा है जो निकल नही रहा। वह बेचैन सा घर में आता है। टूथ पिक हाथ में लेकर सोफ़े पर लेटा लेटा दांत खोदता है। फिर चैन की साँस लेता है। कुछ हो देर बाद लगता है की अभी भी फंसा हुआ है, वह ज़बान ऊपर नीचे करके उसे टटोलना चाहता है मगर पता नही चलता। उस बार वह मज़बूत धागे से दांत के बीच फंसे हुए को निकालता है,कुछ निकल जाता है, सुकून मिलता है।
रात के खाने में सामने तरह तरह की सब्ज़ियों के बीच उसे फिर दाँतो में कुछ फंसा लगता है। वह फिर बेचैन होता है।आखिर सामने बैठी माँ पूछ बैठती है की दाँतो में क्या फंसा है, क्या खाया है, कुछ नॉनवेज तो नही खाकर आए हो।
वह न में सर हिलाता है और याद करता हैआज जब उसके मुहल्ले की भीड़ उस दूसरे धर्म के लड़के को दौड़ा दौड़ा कर मार रही थी,पीट पीट उसकी जान निकाल रही थी।उसके ज़िंदा गोश्त को बोटी कर कर के तो वही लोग फ़ेंक रहे थे।तब वह तो चुप चाप खड़ा सिर्फ देख ही तो रहा था,तो यह गोश्त के रेशे उसके दांत में क्यों फंस रहे.......
No comments:
Post a Comment