Wednesday, April 11, 2018

जन्नत बच्चे और आँसू

जन्नत में एक बहुत बड़ा पेड़ लगा हुआ है।उसकी पत्तियाँ सफ़ेद हैं और सन् सफ़ेद ही रुई के फायों की तरह फूल है ।पूरे पेड़ की डालियाँ बहुत दूर दूर फैली हुई हैं ।पेड़ के नीचे नरम पंखो की तरह सफ़ेद चादर बिछी हुई है। पूरी जन्नत की यह सबसे खूबसूरतजगह है, क्योंकि यहीं इसी पेड़ की छाँव में मोहम्मद साहब,रामजी,ईसा और कान्हा बैठ कर अपनी गढ़ी दुनियाँ को देखते हैं।

आज जब वह सब पेड़ के नीचे थे तो हमेशा सुक़ून में रहने वाली जन्नत की सबसे खूबसूरत जगह सिसकियों से भरी हुई थी ।पेड़ के हर तरफ सफ़ेदी पर सुर्ख़ ख़ून के बहने के निशान थे ।सभी धर्म के मुखियाओं ने एक साथ ऊपर देखा,जिधर से ख़ून की धारा बह रही थी।
उसपर एक बच्ची सिसक रही थी ।उसके रोने के साथ डालों पर खेलते बाकी बच्चे भी रो रहे थे । कान्हा ने लपक कर उसे अपनी गोद में उठा लिया और उसके चारो तरफ ईसा, मोहम्मद साहब और रामजी बैठ गए ।सबने एक साथ कहा,इस पेड़ पर सिर्फ बच्चे रहते हैं ।दुनिया के हर हिस्से में मारे गए बच्चे यहीं तो सुकून पाते हैं।देखो उस डाल पर सब सीरिया से आए बच्चे हैं और तुम्हारे ठीक बगल मे भारत से,
बेटी भला जन्नत में भी आँसू,ज़ख्म,तक़लीफ़ और ख़ून ।

यह क्या है, यहाँ तो सारी तक़लीफें खत्म हो जाती हैं और ज़मीन के तमाम अच्छे काम यहाँ हर परेशानी को ख़ुशी में बदल देते हैं। तुम यहाँ भी दर्द में तड़प रही हो,पूरी जन्नत आज बेचैन है, यह हो क्या रहा है ।
तभी दूर बैठे नानक अपनी चादर से आँसू पोछते हुए कहते हैं, तुमहे पता है यह बच्ची यहाँ भी क्यों रो रही है ।क्योंकि इसे यहाँ हमारी सूरत दिख रही है ।वही सूरत जिसके नाम पर इसको ज़मीन पर हमारे ही पूजने वालों ने हमारे ही आँगन में नोच नोच करके,पत्थर पर पटक पटक कर मार डाला ।

ऊपर से तुम्हारे हमारे सबके मानने वाले इस बच्ची के बहते ख़ून को खुद के मुँह पर मलकर हमारे तुम्हारे सामने आते रहे और हम यहाँ से यह सिर्फ देखते ही रह गए । तभी रामजी खड़े हो जाते हैं और तक़लीफ़ और गुस्से की आवाज़ में कहते हैं, यह मेरी बच्ची है।ऐ मोहम्मद सरयू के पानी की सौगन्ध वह धरती पर कभी शाँति नही आने दूँगा,जिस धरती पर इस बच्ची का क़त्ल हुआ है ।हर उसको तड़प तड़प कर नरक द्वार जाना ही होगा जिसने इसका समर्थन किया है ।ऐ मोहम्मद शर्मिंदा हूँ मैं, देखो कान्हा की आँख भी नही उठ रही।

तभी मोहम्मद साहब लरज़ती हुई ज़बान से कहते हैं, हे राम,मायूस मत हों,यह जो कर रहें हैं, वह आपके खिलाफ ही है ।मेरे भी बहुत से मानने वाले अल्लाह हू अकबर कहकर यही सब करते रहें हैं ।हम,आप और बाकि सब जानते हैं इन इंसानों की करतूतें बहुत बद्तर हो चुकी हैं ।यक़ीन जानो हमे वह दिख रहा है, जो यह नही देख पा रहे।हमे इनके खुद के आँगन में ही दोज़ख दिख रही है।यह सब इस बच्ची के ख़ून में शामिल या खामोश लोग उस आग के बहुत नज़दीक़ पहुँच चुके है।यह खत्म होने की कगार पर हैं ।

बच्ची रोए जा रही है ।इंसानों के दिए उसके ज़ख्म पर हर पैग़म्बर और देवता अपनी ओढ़ी चादर से ख़ून पोछ रहें हैं ।रो रोकर मरहम रख रहें हैं ।अपने नए आए इस नन्हे मेहमान से जन्नत में दूसरे बच्चों की सिसकियाँ बढ़ रहीं हैं ।
और यहाँ नीचे, ज़मीन पर सब कुछ सामान्य है, यहाँ फिर कुछ बच्चियां हँसते हुए बाहर निकली हैं और साथ ही बाहर निकले हैं, वह,जिन्हें अपने धर्म,अपनी क़ौम के लिए इनकी मुस्कुरहट को कुचलना है।बाकि सब अपने अपने घरों में बच्ची और मारने वालें दोनों को पाल रहें हैं, कल किसने देखा है, जिसे हम घर समझ रहें,दोज़ख बन जाए शायद....

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