इसे पढ़िए,देखिये इन्हें मानने वाले इसके ठीक कितना उल्टा हो चुके हैं।इंसानियत,भाईचारे और समानता की कितनी बातें इसमें पैबस्त हैं, मगर इन्हें मानने वाले बहुत से लोग अपने ही घर में इन उसूलों से दूर हैं।यह पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद साहब का आख़री ख़ुत्बा है ।मेरी खुद की ज़िन्दगी में मज़हब बेहद कमज़ोर हालत में है, जो है, वह यही है, यहीं से मेरा मज़हब शुरू और ख़त्म होता है।हो सके तो इसे पढ़िए,याद रखिये,रटवाइये और ज़िन्दगी में उतारिये ताकि एक खूबसूरत इंसान बन सकिये ।मस्जिदों,मेम्बरों,जलसों,महफ़िलों में इसे तेज़ तेज़ पढ़िए
पैग़म्बर मोहम्मद साहब लरज़ती हुई ज़ुबान में कहते हैं...
"मेरे प्यारे भाइयो! मैं जो कुछ कहूँ, ध्यान से सुनो। ऐ इंसानो! तुम्हारा रब एक है।
अल्लाह की किताब और उसके रसूल की सुन्नत को मजबूती से पकड़े रहना।
लोगों की जान-माल और इज़्ज़त का ख़याल रखना, ना तुम लोगो पर ज़ुल्म करो, ना क़यामत में तुम्हारे साथ ज़ुल्म किया जायगा।
कोई अमानत रखे तो उसमें ख़यानत न करना। ब्याज के क़रीब न भटकना।
किसी अरबी को किसी अजमी (ग़ैर अरबी) पर कोई बड़ाई नहीं, न किसी अजमी को किसी अरबी पर, न गोरे को काले पर, न काले को गोरे पर, प्रमुखता अगर किसी को है तो सिर्फ तक़वा(धर्मपरायणता) व परहेज़गारी से है अर्थात् रंग, जाति, नस्ल, देश, क्षेत्र किसी की श्रेष्ठता का आधार नहीं है। बड़ाई का आधार अगर कोई है तो ईमान और चरित्र है।
तुम्हारे ग़ुलाम, जो कुछ ख़ुद खाओ, वही उनको खिलाओ और जो ख़ुद पहनो, वही उनको पहनाओ।
अज्ञानता के तमाम विधान और नियम मेरे पाँव के नीचे हैं।
इस्लाम आने से पहले के तमाम ख़ून खत्म कर दिए गए। (अब किसी को किसी से पुराने ख़ून का बदला लेने का हक़ नहीं) और सबसे पहले मैं अपने ख़ानदान का ख़ून–रबीआ इब्न हारिस का ख़ून– ख़त्म करता हूँ (यानि उनके कातिलों को क्षमा करता हूँ)|
अज्ञानकाल के सभी ब्याज ख़त्म किए जाते हैं और सबसे पहले मैं अपने ख़ानदान में से अब्बास इब्न मुत्तलिब का ब्याज ख़त्म करता हूँ।
औरतों के मामले में अल्लाह से डरो। तुम्हारा औरतों पर और औरतों का तुम पर अधिकार है।
औरतों के मामले में मैं तुम्हें वसीयत करता हूँ कि उनके साथ भलाई का रवैया अपनाओ।
लोगो! याद रखो, मेरे बाद कोई नबी नहीं और तुम्हारे बाद कोई उम्मत नहीं।
आज मैंने तुम्हारे लिए दीन को पूरा कर दिया और तुम पर अपनी नेमत पूरी कर दी"
यही धर्म है, जिससे इस्लाम के मानने वाले कोसों मीलों दूर हो चुके हैं ।इधर उधर की नुक़्ताचीनी की जगह,शिकवे शिकायत की जगह अगर यह अपनी ज़िन्दगी में इस आख़री मश्विरह को मान लें, तो ज़मीन पर इनसे किसी को कोई ख़तरा न रहे,यह खूबसूरत फूलों के बीज बनकर ज़मीन को महका दें,मगर...
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