Friday, April 13, 2018

वहशी बन सकते हैं!

हम किसी भी अपराधी को सड़क पर खीचकर मार नही सकते ।लाख तक़लीफ़ में हों मौत की सज़ा की वक़ालत नही कर सकते ।हर हाल में बस इतना चाहेंगे की कानून अपना काम ईमानदारी से करे ।
हम तो अपराधियों की तस्वीर साझा करना भी सही नही समझते ।बलात्कार से टूट ज़रूर गए हैं मगर अपने हाथों को किसी के ख़ून में सना हुआ देखने के लिए दिल कभी तैयार नही होगा ।
आप हमे जीभर गालियाँ दीजिये,अनाप शनाप बकिये मगर यह यक़ीन जाने हम अंत तक यही कहेंगे की इसमें शामिल हर अपराधी को सज़ा न्यायालय दे ।हम इन घटनाओ का विरोध ही कर सकते हैं ।हमारे हाथ में न शासन है की फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बना दें,न प्रशासन हाथ में है और न ही किसी भीड़ का समर्थन कर सकते हैं, जो इन्हें सार्वजनिक स्थानों पर फाँसी देने की वक़ालत करे।

हम अपने हर एक की लाश पर खड़े होकर भी बुराई से अपने उसूलों के साथ लड़ने के लिए तैयार हैं ।मेरे अपने घर में दंगो  में टुकड़े टुकड़े में लाश आई मगर फिर भी हमारे बड़ो ने उस दर्द को ज़ब्त करके समाज को एक करने पर ध्यान दिया,यह परवरिश हम भुला नही सकते।

एक बात की गिरह बाँध लें,वहशी से लड़ते लड़ते खुद को वहशी न बनने देना भी एक बहुत बड़ा काम है ।जहाँ अच्छे अच्छे चूक जाते हैं ।हम आम अवाम की बात नही कर रहे मगर जो खुद को समाज के लिए तैयार कर रहें,वह हिम्मत रखे,धैर्य रखें और अंत तक लड़ते हुए अपने आप को बुराई से दूर रखें।

हम किसी के भी मीडिया ट्रायल के खिलाफ हैं ।बस सख़्त और ईमानदार क़ानूनी करवाई हो,इसी के लिए दबाव बना रहें ।इन आंदोलनों,मोमबत्ती के जुलूसों, उपवास से ही आज दोनों मामलो में कानून सख़्त हुआ है।गिरफ्तारी हुईं हैं।इस्तीफे हुए हैं।हमारा हर क़दम कानून को प्रभावी करना है न की आरोपियों को खींचकर सड़क पर मार देना।आप सब भी कोशिश कीजिये की ऐसे ख्याल भी मन में न आएँ, वरना एक बार हिँसा मन में बैठ गई तो कभी भी विध्वंस का रूप ले ही लेगी ।कभी भी आप उस पाले में खड़े मिलेंगे जिनका  आज विरोध कर रहें हैं।सम्भल कर चलिए,वक़्त कठिन भी है और नाज़ुक में,इंसान और वहशी बनने में सूत भर का फासला है, खुद को बचा लीजिये।

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