Tuesday, April 24, 2018

निर्लज्जता समय के खड़ग सिंह की

किसी को बचपन के कुछ चैप्टर अगर याद हों तो उनमे से एक थे बाबा भारती ।जिनका घोड़ा खड़ग सिंह डाकू एक बीमार अपाहिज के वेष में छल करके छीन ले जाता है ।बाबा भारती उस भागते हुए डाकू से सिर्फ इतना कहते हैं की यह घटना किसी को मत बताना,वरना लोगों का बीमार ज़रूरतमंद पर से विश्वास हट जाएगा।उनकी मदद कोई नही करेगा ।

यह सन्दर्भ क्यों लिया,क्योंकि हालात ही कुछ ऐसे पैदा हुए हैं ।एक व्यक्ति है, जो कुछ भी करके अपने अस्पताल में मर रहे बच्चों को बचाने निकलता है ।अगस्त में जब बच्चे मरते हैं, कहकर लोग जान छुड़ा लेते हैं, तब वह पसीने से तर बतर पूरे भारत की सबसे गहरी और दर्दनाक रात को मदद करने भागता फिरता है ।जिसको दुनिया सलाम करती है मगर किसी की आँख में वह इस क़दर चुभने लगता है की उसकी यही नेकी उसकी ज़िन्दगी का जंजाल बन जाती है ।

बाबा भारती के वक़्त एक डाकू  धोखा देता है,जिसे बाबा भारती के वचन बेचैन कर देते हैं ।अब स्थिति बदली हुई है, उस डाकू की जगह एक शानदार व्यक्तित्व है, जो कहता है, "मीडिया के सामने बहुत हीरो बन रहे हो,देख लेंगे तुम्हे ।" अब बस फ़र्क इतना है की इस वक़्त बाबा भारती के पाले में खड़ा शख्स यह नही कह सका की, महराज यह क़िस्सा किसी को मत बताइयेगा वरना लोगों का नेकी करने से भरोसा उठ जाएगा ।बाबा भारती के सामने तो वखड़ग सिंह  प्रयाश्चित करने आता है, इसके ठीक उलट आजका यह शख्स बिना सुनवाई और बेल के महीनों से जेल में है ।

हम सबको देखिये,उसका नाम लिखते ही,हमे उसमे से गुनाह की बू आने लगती है ।उसका मज़हब ही उसके गुनह की चुगली करता है ।हमे पता है, कुछ लोग मन से ही मान चुके हैं की वह डॉक्टर ही गुनहगार है, हम इन मानसिक बीमार लोगों की तरफ मुँह भी नही करते ।मेरी फ़िक्र बस इतनी है की कहीं लोग नेकी करना ही न छोड़ दें ।क्योंकि बहुत तंग नज़र और छोटे से दिल के लोगों को नाम और काम दोनों खटकते हैं ।बाबा भारती के वक़्त के डाकू के तो दिल भी था मगर अब यहाँ इसकी भी कोई गुंजाईश नज़र नही आती ।...

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