Wednesday, October 10, 2018

गाँधी और पलायन

यह गाँधी के देश के लोग हैं । मुझे हैरत होती है की गाँधी को गुज़रे अभी सौ साल भी नही हुए और उनके पीछे लोग इस क़दर कमज़ोर हो गए । अफ्रीका में ग़ैर बराबरी की एक मिसाल ने गाँधी को इतना आहत किया की विक्टोरियन साम्राज्य ही सिकोड़ दिया गाँधी ने और अब

अब तो उनकी ज़मीन पर एक आध गुंडा मवाली खड़ा होकर कहता है की मेरा प्रदेश छोड़ो और भीड़ रेलवे स्टेशनों का रुख कर लेती है ।पूरे एक हिस्से को जिसे धर्म के नामपर तो आप एक करके वोट बटोरते हैं मगर क्षेत्र और भाषा के नामपर खुद पर लगा धब्बा मानकर धो देना चाहते हैं ।
मुझे उन गुंडों के व्यवहार पर रत्ती भी चिंता नही ।वह आपको मन्दिर मस्जिद का शगूफा पकड़ाकर अपनी भूमि पर व्यापार और उद्योग लगाएँगे ।
मुझे उनसे दिक्कत है, जो गाँधी को जपते हैं, पूजते हैं, मानते हैं । वह लोग आखिर क्यों नही निकल कर स्टेशनों पर आए ।

लोगों को वहीं, उसी शहर मेंभूखे प्यासे उपवास करने को क्यों नही कहते ।क्यों नही हर एक वहीं अपनी मौत तक टिकने का साहस रखता ।आपको लग रहा होगा यह जज़्बाती और ख्वाबी बातें हैं ।
तभी तो कह रहें की क्या यह गाँधी का देश है ।जहाँ गैर बराबरी तो बर्दाश्त है, क्षेत्रवाद,भाषावाद तो बर्दाश्त है मगर प्रतिरोध नही ।

यह जो उत्तर प्रदेश और बिहार के राज्यों में भीड़ की भीड़ वापिस आरही ,यह डराती है की हमारी आबादी कितनी कमज़ोर और डरी हुई हो गई है ।वह पलट कर जूझने की जगह भागने को बेहतर समझती है ।
हमारे हर एक को समझना होगा की इस देश में किसी की यह औक़ात नही होनी चाहिए की वह किसी भी समुदाय को क्षेत्र,जाति, भाषा,धर्म के नामपर डराकर पलायन करने पर मजबूर करे ।यह निकम्मे शासन का स्पष्ट नमूना है।
जिन्हें लगता है की इनके राज्य में काम होता तो यह पलायन नही करते,वह भी कान खोलकर सुन लें की चाहे काम हो या न हो,आप एक नागरिक पर पहरे नही डाल सकते ।यह तो वही बहाना है की हमारे लड़के लुच्चे लफंगे हैं तो लड़कियां घर से न निकलें ।जिसका जहाँ जी चाहे वहाँ रहे,उसकी रक्षा की जगह बहानेबाज़ी ख़ूब सुनाई देती है।
हाँ अगर ज़रा सभी या कहें मुद्रा पर छपे जितने भी गाँधी हममे बाक़ी हैं, तो लौटते हुए लोगों को रोकिये और उपवास करते हुए जूझना समझाइये ।जिन्हें लगता है यह मज़दूर क्या जाने अनशन और उपवास,वह पढ़ें आज़ादी की सारी लड़ाई ऐसे ही मज़दूरों ने लड़ी है। भागती हुई भीड़ कमज़ोर राष्ट्र का लक्षण है । सब लोग मिलकर इसे रोकिये,अपने अन्दर से क्षेत्र,भाषा,लिंग और धर्म का अन्तर निकाल फेकिए वरना इस देश के असली दुश्मन आप ही होंगे ।

गाँधी का देश जूझने वाला होना चाहिए,घुटने के बल बैठकर प्रशासन,गुंडे मवाली गिरोहें से रहम माँगने वाला नही । आगे आइये अगर मुल्क़ से मोहब्बत है, जाती हुई भीड़ को रोकिये और कहिये हम और आप अंत तक यहीं रहेंगे ।न मारेंगे और न मानेंगे ।यहीं रहेंगे जब तक मेरी मर्ज़ी ।यह कहने वाली लीडरशिप दफ़न हो चुकी है, बस ट्वीटयाने वाले लीडर रह गए हैं ।इसलिए खुद ही मशाल उठाइये और अपने अंदर का गाँधी जगाइए इस गैरबराबरी और अन्याय के विरुद्ध ....

No comments:

Post a Comment