Tuesday, October 23, 2018

दर्शन

"संसार एक उद्यान है, जिसकी सिंचाईं राज्य से होती है । राज्य एक शक्ति है जिसपर धर्म का जीवन मरण आधारित है । धर्म एक राजनीती है, जिसकी बागडोर  बादशाह के हाथ में है । बादशाह उस व्यवस्था के लिए उत्तरदायी है जो सेना की सहायता पर निर्भर है । सेना उन सहायकों के समूह का नाम है जिनका पालन पोषण धन द्वारा होता है । धन वह कर है जो प्रजा से एकत्र किया जाता है । प्रजा उन लोगों के समूह को कहते हैं जो न्याय के आधार पर जीवित रहता है । न्याय वह उत्तम वस्तु है जो संसार के अस्तित्व का कारण है ।"

सिर्रुल असरार में अरस्तू ने यह आठ वाक्यों का गोला बना दिया और इसी में दर्शन और राजनीती के ऐसे टाँके लगाए जिसकी कढ़ाई देख आने वाली नस्लें पलकें ही झुकाती रहीं । इस गोले का कौन सा वाक्य सिरा है और कौन अंत, पता नही,कहाँ से शुरू और कहाँ ख़त्म ।बस इतना पता है की सर्वोश्रेष्ठ शासन वह है जो न्याय कर सके । न्याय,जो प्रकृति या ईश्वर ने किया है ।मैं हर उस शासन को शासन ही नही मानता जहाँ शासक अन्याय करे ।
वैसे मैं दिन रात लगा हूँ की अरस्तू,अल मिस्क काफ़ूर,अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद,अबु जाफ़र मुहम्मद बिन जरीर अत्तबरी, मुहम्मद बिन उमर अल वाकेदी ,अली बिन हुसैन अल मसऊदी, ह्य्यान बिन खलफ़,अब्दुर्रहमान इब्ने खलदून,अफ़लातून और सुकरात की खोलकर फिर से बांधी गिरह खुल जाएँ ।ज़माना ज़माने की नब्ज़ पकड़ना सीख जाए ।वह जान जाए की आज़ादी,ख़ुराक और इंसाफ किसी भी इंसान के इंसानी पहचान की पहली शर्त है, जिसे कोई दूसरा इंसान खत्म नही कर सकता बल्कि इसे पूरा करने में मदद ही कर सकता है, तभी वह इंसान हुआ ।ख़ैर आपका भेजा क्या चाटना ऊपर के आठ वाक्यों में खुद को जहाँ चाहे फिट करें,आपकी मर्ज़ी...

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