कभी कंचे देखें हैं । चिकने,गोल और चमकीले मगर इनमे दोष होता है ।अना का दोष ।यह कंचे कभी एक दूसरे को सहयोग करके ऊँचा पहाड़ नही बन सकते हैं । यह फिसल कर बिखर जाएँगे,यह फिसलन इनकी अना है, जो दूसरे कंचे को बर्दाश्त नही कर सकती,उसका वज़न नही उठा सकती ।
वहीं ऊबड़ खाबड़ पत्थर के टुकड़े हों या चौकोर गिट्टियां या मिटटी का ढेर ।यह एक दूसरे को पकड़ कर ऊँचा पहाड़ बना सकते हैं जानते हैं क्यों,क्योंकि इनमे अना नही है ।यह एक दूसरे का वज़न उठा सकते हैं और मिलकर ऊँचा हों सकते हैं ।
अगर तुममें अना है तो तुम कंचे ही हो,अकेले अकेले चमको और गोल गोल घूमते हुए अपने जैसे दूसरे कंचो से लड़कर,मारकर,जीतने का जश्न मनाओ ।
अगर तुम अपनी अना को मिटा दो,तो हर एक को जोड़कर,पहाड़ जैसी सभ्यता हो,या संगठन हो दोनों को ऊँचाइयों पर ले जाओगे ।
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