जब लड़कियो को ज़िंदा ज़मीन में गाड़ दिया जाता था।जब औरतों को हर हुक़ूक़ से महरूम रखा जाता था।इल्म से मायूस थी ज़मीन।जिहालत का बोलबाला था।इंसानी रिश्ते रोज़ टूट और बिखर रहे थे।नफरत आसमान छू रही थी।इंसान इंसान को ही गुलाम बना रहा था।बेइंसाफी और बेईमानी तख्तों पर बैठ मज़लूमो पर हँस रही थी।तब वह रौशनी बन कर आए।उन्होंने इंसान को इंसान बनाया।लड़कियो को ज़िन्दगी और इज़्ज़त की वकालत की।गुलाम को मालिक की सफ में बराबर खड़ा कर दिया।बेइंसाफी और बेईमानी का गला घोटा।भाई को भाई की मोहब्बत दी।इंसानियत को आसमान तक बुलंदी पर लेकर गए।वह थे हज़रत मोहम्मद।
वही रसूल जो हातिम ताई की बेटियो को देख तख्त से खड़े हो जाते थे।जिन्होंने अपनी बेटी की हमेशा इज़्ज़त की और पहली बार बेटियो को बाप की जायदाद में एक बड़ा हिस्सा फ़र्ज़ किया।यह वही हज़रत मोहम्मद हैं जिनपर कूड़ा फेंका जाता था।रास्ते में काँटे बिछा दिए जाते थे फिर भी बिना उफ़्फ़ किये हर फर्द को गले लगाया।जिसने दुनिया को जिहालत से निकाला उन हज़रत मोहम्मद को याद कर लें।अफसोस होता है की हर तरह के उदाहरण देने वालों ने भी हज़रत मोहम्मद को नही पढ़ा।उन्हें आप इस्लाम,पैगम्बर से अलग हट कर तो पढ़ ही सकते हैं।देखिये उनमे और इन मुसलमानो में कितना फ़र्क है।यही फ़र्क आपको श्री राम और उनको मानने वालों में मिलेगा।हज़रत मोहम्मद को पढ़ना और ज़िन्दगी में उतारना एक बड़ा कदम है।जो कमज़ोर ज़हन से मुमकिन नही है।
दोस्ती,रिश्ते,गरीब,हक़,फ़र्ज़,पानी,पहाड़,ज़मीन,बड़े,बच्चे,बूढ़े,औरत,कमज़ोर,लाज़ार,खानपान,इल्म,मेहनत,मज़दूर सब पर निगाह रखने वाले हज़रत मोहम्मद की ज़िन्दगी को पढ़ लीजिये।देख लीजिये।परख लीजिये।जैसे हर आदर्श को अपनाते हैं वैसे ही हज़रत मोहम्मद को भी देखिये । उनकी ज़िन्दगी में गुँथी फिलॉसफी को समझिये क्योंकि एक बार यह डोर पकड़ ली तो काफ़ी कुछ हाथ आ जाएगा ।जो पैग़म्बर मानकर हज़रत मोहम्मद को बस रट रहें हैं उनसे इतर,उनकी ज़िन्दगी की बारीक़ी में झाँकिये आपको वह सूत्र मिलेगा जो शिखर पर ले जा सकेगा...
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