Monday, November 5, 2018

दीपावली

दीपावली के दीपक जलाने से पहले आजके नवभारत टाइम्स में स्पीकिंग ट्री पढ़िए । मानिये या न मानिये जानना तो ज़रूरी है....

हम तमाम दर्द,तमाम कमियों,तमाम अधूरी रह गई इच्छाओ के बाद भी अपने साथ साथ दूसरों के चेहरों पर मुस्कान लाने की परम्परा बनाए रखने वाले लोग हैं.पूरे साल हमारी जिंदगी में तमाम तकलीफे भले ही रही हों, आनंद का एक ही पल काफी है,हमे उल्लासित करने के लिए.पूरा देश ही नही वरन संसार के दूसरे देशों में भी हम सब दीपोत्सव मनाने जा रहें है.एक ऐसा त्यौहार जिसकी रौशनी से यह पृथ्वी जगमगा उठेगी.एक ऐसा माहौल जो हर हृदय पर असर ज़रूर डालेगा की वह अपने हृदय का अँधेरा मिटाता है या और ज़्यादा बढ़ाता है.

जब दीवाली शुरू होगी तो जिज्ञासु मानवमन जरुर पूछेगा की आखिर यह उत्सव क्यों ? आखिर वह कौन सी वजह है जो हम अपने घर और आंगन को रौशनी से भर दें.तब वह पन्ने पलटकर भगवान कृष्ण के साथ सत्यभामा का वह रूप देखेंगे जिनकी आज जरूरत है.दीवाली की शुरुआत में ही वह जानेंगे की नरकासुर कौन था .वह उस अपराध को भी जानेंगे जो नरकासुर ने किया था. सोलह हज़ार लड़कियों को कैद में रखने वाला नरकासुर सत्यभामा के साथ खड़े कृष्ण के हाथ जब मृत्यु पाता है तब महिलाऐं ख़ुशी से झूम उठती हैं और कृष्ण के उन सबों के साथ लौटने पर दिए जलाती हैं.घर में खुशबु महकाती हैं ताकि कृष्ण के माथे पर लगे नरकासुर के खून की दुर्गन्ध मिट जाए.

यह बात जानना और ज़रूरी है की महिलाओं के प्रति हमारा नजरिया क्या हो.वह कौन सा अपराध है जो सबसे बड़ा अपराध है.नरकासुर के अत्यचार की सीमा नही थी मगर जैसे ही उसने महिलाओं पर हाथ डाला उसकी मृत्यु की तारीख उभर कर सामने आ गई.आज जब “मीटू कैम्पेन” चल रही है.महिलाऐं जिन्हें हमने बोलने नही दिया,वह अपना दर्द उभार रहीं हैं. उनको हमारे साथ की जरूरत है. सबको पता है की अब कृष्ण नही है जो दिलों का हाल जान ले और सत्यभामा का हाथ थाम कर महिलाओं पर ज़ुल्म करने वाले पर सुदर्शन चक्र चला दें.ऐसे में कृष्ण के स्थापित अध्याय ही काम आएँगे.ऐसे में उनकी शिक्षाएं ही रास्ता दिखाएंगी.

यह जो त्यौहार हैं,यह खुद बताते हैं की देखो हममे कितना इतिहास गुंथा है.मुझमे लिपटे हुए उस अध्यात्म को पकड़ो जो संसार में खुशिया लाए.यह भी दीवाली हमेशा की तरह आएगी और चली जाएगी.कुछ लोग होंगे जिनके घर दो तीन दिन रौशनी रहेगी और कुछ लोग होंगे जिनके हृदय हमेशा के लिए रोशन हो जाएँगे.जिनके हृदय में प्रकाश पहुच गया समझो मेरे कृष्ण वहां पहुच गए. अब कृष्ण को तो सब ही अपने हृदय में लाना चाहते हैं,तो भला कृष्ण हर हृदय में क्यों जाएँ.तब कृष्ण ने चुना जो हृदय महिलाओं के दर्द पर तडपेगा,कृष्ण वहां जाएँगे.जो महिलाओं पर होते हुए अत्यचार पर व्याकुल होकर रोकेगा,कृष्ण वहां होंगे.

जो अपने हृदय के अंदर का नरकासुर मारेगा उसके हृदय में कृष्ण का दीप जलेगा.
राम एक अहंकार को तोड़कर लौटते हैं तो कृष्ण एक अत्यचारी का दमन करके लौटते है.तब ही जनता इनके पांव के नीचे बिछ जाती है और रौशनी से इस धरती को नहला देती है.अब जरा गौर से देखिये अगर आपके होने से किसी पर अत्याचार हो.अगर आपका कोई भी अहंकार किसी को नीचा दिखाए.अगर आप के खड़े होने से कोई भयभीत हो,आपकी परछाई से कोई महिला सिसकियाँ ले,आपके होने से बूढ़े दुबकने लग जाएँ तो समझ लीजिये आपके हाथ में जो दीप है वह दीप नहीं बल्कि आग है. दीप तो वह होता है जो अँधेरे को हटाए . सच और झूठ का फर्क दिखाए. धर्म और अधर्म का अंतर उभारे. इस दीपावली ऐसे ही दीप जलाइए जो मन का सारा विकार हटाकर हमे इन्सान बना दे.

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