ईश्वर ने हमे सींघ नही दी । उसने हमे लम्बे लम्बे दांत नही दिए जिससे हम कुछ चीड़ फाड़ सकें । उसने हमे चार पैर नही दिए जिससे हम तेज़ भाग सकें । उसने हमे जिस्म पर बड़े बड़े बाल नही दिए जिससे हम ठण्ड या हमलों से बच सकें ।उसने हमे पँख नही दिए की हम उड़ सकें । उसने हमे नोकीली चोंच नही दी । उसने हमे ज़हर नही दिया की काटकर हम दो सेकण्ड में दुश्मन को मार सके ।
कितना अन्याय किया न ईश्वर ने मनुष्य के साथ । नही ईश्वर ने इन सबकी जगह हमे जानते हैं क्या दिया,धर्म ।
धर्म ने सींघों की कमी पूरी की,दाँतो की कमी पूरी की,पंखो और बालों की कमी पूरी की । अब आप धर्म से किसी को चीड़फाड़ सकते हैं । चाहे तो यही धर्म से किसी की सुरक्षा कर सकते हैं, चाहे हत्या । जैसे जानवर अपनी सींघ से सुरक्षा करे या पगलाया हुआ दूसरे को मारता फिरे ।
धर्म आपको भेड़ भी बनाता है और भेड़िया भी ।कबूतर भी बनाता है और शिकरा भी । केचुआ भी बनाता है और साँप भी । यह धर्म एक अचूक अस्त्र है, जो मानव को मिला,जिसने उसकी हर कमज़ोरी को मज़बूती में बदल दिया और मज़बूती को मजबूरी में बदल दिया ।
जब सींघ, दांत, बाल और दूसरे शक्ति के प्रयाय बढ़ रहें हों तो विधान ही इन्हें रोकता है ।यह विधान ही तो धर्म है । बस इसे चलाने और समझने का दिमाग़ चाहिए । जिस तरह सावधानी हटी तो चील एक झपटा मारकर आँख निकाल ले जाएगी उसी तरह सावधानी हटी तो धर्म एक झटके में आपकी नाक उड़ा ले जाएगा । यह रुकता है, अच्छे दिमाग़ से । यह संवरता है शानदार दिमाग़ से ।
मनुष्य अपने दिमाग़ से खूँखार जानवरों को भी पालतू बना लेता है । यदि वह धर्म का सही इस्तेमाल करे तो सब बेहतर रहे । ज़रा से चूका नही की यही धर्म मनुष्यता को नष्ट भी कर देगा ।
ईश्वर ने जानवरों को जो ताक़त दी,कभी कभी वही ताक़त उनकी मृत्यु का कारण बनती है । इसी तरह मनुष्य को धर्म की एक ताक़त दी,तो कमज़ोर दिमाग़ यह ताक़त लेने लायक ही नही बने और इसी से विध्वंस शुरू कर दिया । जब आपके अंदर का धर्म बिगड़ जाता है या उसमे केमिकल लोचा हो जाता है तो आप विध्वंस के प्रयाय बन जाते हैं ।मानव जाति के संघारक बन जाते हैं । जैसे ही यह सही होता है, आप मानवता और प्रेम को पोषित करने लग जाते हैं और यही धरती आनन्द का प्रयाय बन जाती है । अब तय करना यह है की आप धर्म रूपी अपने पंखो से ऊँचे आसमान में उड़ते हैं या ज़मीन में किसी की आँख फोड़ने की फ़िराक़ में घिनौने पेड़ की शाखा में बैठते हैं ।
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