Wednesday, July 5, 2017

भीख के हाथ

मैं तड़प कर रह गया जब एक बच्चा भगवान की तस्वीर लिए मेरे सुक़ून भरे दिनों की प्रार्थना कर रहा था।भीख माँगता वह बच्चा भगवान को हाथ में लिए सख़्त धूप में कभी इधर भागता तो कभी उधर भागता।उसके पैर में न चप्पल और तन पर न ढंग का कपड़ा।आँखे धँसी और भूख से ग़ायब पेट ऊपर से ज़ेबरा लाइन से झलकती पसलियां।वह बार बार भगवान की तस्वीर मेरे सामने बढ़ा दे,आखिर रुक कर मैंने उस भगवान पर ही सवाल कर दिया,जो तुम्हे इस क़दर धूप में दूसरे इंसानों के सामने हाथ फैलवा दे,वह भगवान किस काम का,वह तुम्हारे कहने से दूसरे का क्या भला करेगा।

मैं बार बार सोचूँ की यह जो भगवान है किस काम का है।इस बच्चे की मदद कर नही पा रहा और बच्चा इनसे अपनी मदद की जगह हमारी मदद की भीख माँगकर दो रूपये की जुगाड़ कर रहा है।कितना अजीब है न।बच्चों को भीख माँगता देखना मेरे दिल को बेहद तड़पाता है।मैं भगवान की लानत मनामत करता हुआ मार्क्स लेनिन तक पहुँच गया।पूंजीवाद,साम्राज्यवाद तक सोच डाला।इस पूरी व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करता हुआ कॉफी हॉउस में दो कप कॉफी उँडेल गया।गाँधी के बारे में सोचा,तो थोड़ा सा विवेकानंद भी सरक कर आ गए।मदर टेरेसा भी सफ़ेद चादर ओढ़े हमारे इस ग़म में शामिल हो गई।

मैं मेज़ पर बैठा उस भगवान की उस बच्चे की हथेली में बैठे होने की मुस्कान सोच सोच कुढ़ने लगा।कैसे भगवान है जो बच्चे से भी भीख मनवा रहें हैं।इसका मतलब यह तो हैं ही नही।कोई भगवान हो ही नही सकता जो बच्चों के जलती सड़क पर नँगे पाँव चलने से तड़प न जाए।तभी कॉफी हॉउस से बाहर निकला।वारामदे में कुछ लोग ज़मीन पर किताबें और पोस्टर बेच रहे थे।

मेरे मन में कौंधा की आखिर कितनी नामवर नामवर फ़ोटो यहाँ सजे हैं।क्या इनके नाम पर कोई एक रूपये देगा।मैंने सोचा की यह बच्चा अगर गाँधी,टेरेसा,लेनिन,मार्क्स की तस्वीर लेकर सड़क पर निकले तो क्या कुछ मिलेगा।नही,बिलकुल भी नही।तब मुझे वह मुस्कुराते हुए भगवान याद आ गए।जो हैं की नही।थे या नही।कुछ पता नही।मगर अपनी मामूली सी तस्वीर से दो वक़्त के खाने का जुगाड़ तो करवा ही दे रहें हैं।जिस दिन किसी की तस्वीर,किसी के पेट की भूख मिटाने लग जाएगी उस दिन भगवान का भरम टूटेगा वरना तब तक भगवान भगवान ही हैं।मेरा भी भरम टूट गया की यह तस्वीर किसी काम की नही क्योंकि उस बच्चे की थाली में तब तक साठ रूपये आ गए थे।अब यह पैसे उस बच्चे को मिले या उसको सड़क पर बैठाने वाले को उसका भगवान ही जानता है।

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