Tuesday, January 15, 2019

यह चार्जशीट

हाँ तो अब जब चार्जशीट की शीट बिछ ही गई है तो पर्दे के दूसरी तरफ़ भी देख लीजिए । कन्हैया या उमर ख़ालिद ने क्या कहा और क्या किया यह जगज़ाहिर है । सबके अपने हिस्से के सच हैं और सबके अपने बुने झूठ ।  दो हज़ार सोलह हो या सत्तरह इसे ग़ौर से देखिए,फिर अट्ठारह को देखिए उसके बाद उन्नीस जो गुज़रेगा उसे भी गुज़र जाने से पहले देख सकते हैं ।

आपको याद होगा जब टीवी पर कनहैया और उमर थे और उनके सामने मोदी थे,जो बेहद मजबूत थे ।सोलह में देशद्रोही वर्सेज़ देशभक्त चला,जिसका सबकुछ मोदी को हासिल था और बचा खुचा इन दोनों को मिला था ।हर एक जो मोदी के खिलाफ था वह इनके साथ था ।इन दोनों की जंग में जो सहमी खड़ी थी,वह कांग्रेस थी और जो बिना तवज्जो खड़ा था,वह राहुल गाँधी था ।
फिर वक़्त गुज़रा और सत्तरह के आखरी महीनों के साथ सन अट्ठारह आया ।कनहैया और उमर चैप्टर किनारे लग चुका था ।अब सामना था मोदी और राहुल का ।एक तरफ थे मोदी तो दूसरी तरफ उनकी मुखालफत करती हर ताक़त थी राहुल की ओर । कनहैया और उमर थे ज़रूर मगर सोलह और सत्तरह की काँग्रेस और राहुल की तरह । राहुल को हमदर्दी मिलती गई और उनकी मेहनत पर मोहर लगती गई जिससे मोदी के कई किले एक साथ ध्वस्त हो गए ।

अब आया उन्नीस यानी चिंतन का वर्ष । उसी कमरे के वही चार लोग फिर इक्ट्ठेहुए जो सन दो हज़ार नौ में इक्ट्ठेहुए थे । फ़ैसला सुनाया की जाओ और वह रजिस्टर खोलो जो जेएनयू वाला है, कृपा वहीं अटकी है ।

अब एकबड़ा हिस्सा कनहैया और उमर की चार्जशीट पर बहस करेगा । उनपर डिबेट होगी ।वह सेंटर में होंगे जिसके हर ओर मोदी होंगे और कांग्रेस राहुल संग किनारे खड़ी इस कठपुतली नाच को देखेगी ।अगर वह इसे छुएगी तो जलेगी,दूर रहेगी तो बहुतों से दूर होगी ।खामोश होगी तो चहुँओर मोदी मोदी होंगे । क्योंकि उन्हें पता है उनका आख़री मुकाबला चुनाव में होना है जिसमे सीधे सामने कांग्रेस होगी । यदि यह केंद्र बदल जाए और मुकाबले के दूसरे जनाधारविहीन चेहरे बड़े दुश्मन बनाए जाएं तो विराट पुरुष घोड़े की ढाई घर की चाल चल सकता है ।
यह सब हो सकता है क्योंकि होता आया है ।टीवी जिसको दिखाएगा,वह ही माहौल बनाएगा ।एक बात गिरह बांध लीजिये कन्हैया हों या उमर,यह सब किसी की कुर्सी की गर्मी बनी रहे,उसका ईंधन भर हैं ।हम सब भी सत्ता का ईंधन ही हैं ।
कुर्सी के लिए बहुतों को बदनाम किया जाता है । बिन पेंदी के लोटों को मशहूर किया जाता है । दुश्मन को मक़बूल होने से पहले पर्दे से हटाने के खेल होते हैं । कुछ अवाम जान जाती है तो कुछ कभी नही जान पाती ।
फ़िलहाल राहुल पर्दे से हटे और उनसे ज़्यादा दूसरों पर बात हो तब तो यह फँसा पहिया निकल सकता है वरना नही क्योंकि राहुल को सामने रखकर लाख कोशिश के बावजूद वह लड़ाई देशद्रोही बनाम देशभक्त नही बना सकता । राहुल ने थोड़ा सा धर्म वाला हिस्सा भी हथिया लिया इसलिए उससे धार्मिक लड़ाई भी उतनी आसान नही ।इसके लिए खुद नए दुश्मन बनाए जाएँ, उनमे वह हवा भरी जाए जो वह निकाल सकें ।

एक और आखरी बात देश चुनाव मोड पर जा चुका है । अब हर गतिविधि के तार लोकसभा में करंट ही दौड़ाएंगे ।हर कदम की एक ही दिशा है, लोकसभा चुनाव । नज़दीक़ से देखिए,हम यह नही कहते कि किसे चुने और किसे चुने,बस हर उसे चुने जो कम से कम आपको हर बार उन्हें चुनाव में चुनने का तो मौका देता रहे ।

कनहैया और उमर पर यह चार्जशीट कम है, यह तो राहुल को बहस से बाहर करने की कोशिश है । देश को देशद्रोह बनाम देशभक्त की फ़िज़ूल गढ़ी हुई वेब सीरीज़ में झोंकने की कोशिश भर है । जिसको कुछ एंकर चटखारे के साथ परोसेंगे और घर घर मे नफरत की अँगीठी दहकाएँगे ।एक दिन न मोदी रहेंगे और न राहुल और न ही कोई और मगर कुछ पन्ने रहेंगे ।जिनपर दर्ज रहेगा कि राजाओं ही ने नही बल्कि जनता द्वारा,जनता केलिए चुने हुए सेवकों ने खुद को सेवक बनाए रखने केलिए क्या क्या छल,प्रपंच नही किये ।हम आज भी इंतेज़ार में हैं कि कोई बताए तो सही की यह कौन सी चीज रह गई है जिसे हमने राजनीति में इस्तेमाल न किया हो....

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