कुछ किस्से हमारे जिस्म के साथ दफ़न हो जाएँगे .मेरे जाने के बाद सिर्फ वही रह जाएगा जो दिमाग की खुराफात ने उपजा कर शब्दों में ढाला था.इसलिए जरूरी हो जाता है दिमाग में चलने वाली इन आम से ख़ास खुराफातों को कहीं न कहीं उकेर दिया जाए.अब हम पत्थरों पर शिलालेख लिख नही सकते.जानवरों की खालों,पेड़ की छालों या खंडहर की दीवारों पर कोई अभिलेख लिख नही सकते तो यहाँ आ गए.ब्लोगर पर,अपने दिमाग को दर्ज करवाने....
Monday, January 28, 2019
विचार
बदन की खूबसूरती तब दिखेगी,जब लिबास से नज़र हटेगी । रूह की खूबसूरती तब दिखेगी जब बदन से नज़र हटेगी । मेरी खूबसूरती तब दिखेगी,जब रूह से नज़र हटेगी...रूह के बाद जो है, वह मैं हूँ......
No comments:
Post a Comment