Wednesday, January 23, 2019

घर से बड़ा घर

एक बड़ी सी कालोनी में एक लड़के का बड़ा से घर था । घर मे ऊँची दीवारें,खूबसूरत फर्नीचर,उम्दा पेड़ पौधे,ज़बरदस्त लाइट भी थीं । ज़ाहिर है कालोनी में और भी घर थे,कुछ इससे बड़े कुछ छोटे,कुछ खूबसूरत तो कुछ कम खूबसूरत ।
लड़का अक्सर छत पर खड़ा किसी घर की छत पर रखे गमलों की तारीफ करता,तभी बाप झल्लाई हुई आवाज़ में कहता तुम्हे अपने घर के पेड़ नही पसन्द आएँगे, कमबख्त घर से मोहब्बत नही,लड़का मन मसोस लेता ।
कभी खड़ा होकर किसी और घर की दीवारों की तारीफ कर देता की उसका रंग बड़ा खूबसूरत है, बाप फिर खफा की कमीने को अपने घर के रंग की तारीफ नही करनी,दूसरों की करनी है ।एक दिन तो हद ही हो गई कि रास्ते मे एक घर की चमकती लाइट पर लड़के ने कहा,यह रोशनी कितना सुकून दे रही कि बाप ने हाथ ही उठा लिया । तुम्हे अपने घर की रोशनी नही पसन्द मनहूस,जो यह सुकून देती है । लड़का रो दिया,क्योंकि वह बाप को यह समझा नही सकता था कि दूसरे की तारीफ का मतलब अपनी बुराई करना नही है ।

वह लड़का नही कह सकता कि हमारी दीवारों में सीलन आ चुकी है  कुछ पुरानी हो चली हैं उनकी मरम्मत की ज़रूरत है । वरना कुछ बारिश में ढह जाएँगी । बाप यह बर्दाश्त ही नही कर सकते क्योंकि उनकी आँखों मे आज भी वह सर्वश्रेष्ठ हैं । उनके बराबर का कोई नही ।उनसे बढ़कर कोई नही ।उनसे बुलन्द कोई नही ।उनसे ज्ञानी कोई नही । उनसे खूबसूरत ज़ुबान कोई नही । उनसे बेहतर ज़ायका किसी का नही ।उनसे अच्छा कोई नही ।

लड़का यह नही बता सकता कि स्वकेन्द्रित होना मानसिक बीमारी है ।दूसरों की अच्छाई या तारीफ से चिढ़ना फ्रस्टेशन है । यह खुद से हारे हुए इंसान का फ्रस्टेशन है कि उसमे सुधार हो नही सकता,वह बढ़ नही सकता ।
लड़का जो बाप को देख रहा है । उसे पता है एक दिन जब ज़मीन बेचैन होकर गर्मी बढ़ा देगी । पँखो को चलाने वाली बिजली उसकी हवा थाम देगी ।बादल जो बरसेंगे कम और उमस ज़्यादा बढ़ाएंगे ।
तब कमरों से जिनमे बाप ने खुद को कैद कर रखा है ।छत पर जाएगा,और एक हवा के झोंके के लिए नंगी पीठ पलँग पर लेटकर आसमान तकेगा ।दिल कहेगा कि ए बादल बारिश ला दे,मन कहेगा कि ए दूर लगे वृक्षों हवा को चला दे ।

एक अदद सुकून की नींद के लिए वह नही सोचेगा की उस हवा देने वाले पेड़ से अच्छे उसके घर मे पौधे हैं ।वह नही सोचेगा बादलो से अच्छी उसकी छत है । बाप को जानना होगा कि दुनिया बहुत बड़ी है, उसके पास बहुत कुछ है जो बाप ने देखा भी नही । दुनिया उसके घर,मोहल्ले,शहर,देश से आगे एक बहुत बड़ा गोला है, जिसमे हर तरफ शुरुआत है और अंत है ।

लड़का चीखकर कहना चाहता है कि बाप अब बाप मत बनो । बाप बनना है तो लड़के की ज़िंदगी मे रंग भरो,हवा भरो,खुशबू भरो,प्रेम भरो....दुनिया की तारीफ करो,उससे प्रेम करो,उसके गले लगो...खुद में कैद होंगे तो रोगी बनोगे । खुद में आज़ाद होंगे तो इंसान..समाज का लड़का बनें, बाप मत बने,वरना बहुत सी आज़ाद सांसो के हत्यारे बन जाएंगे..

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