मेरे हाथ से एक चीनी का प्याला टूटकर गिरा की तख्त पर तकियाओं से बने तख्ते ताउस पर बैठे चचा बोल उठे,कभी कोई काम किया हो तो ढंग भी आए। हमेशा फुर्ती नीलगाय वाली,सिवाए रौंदने के कुछ आया है तुम्हे,मुँह में दो चार पत्ते आएँगे और फसल पूरे खेत की चौपट । हम भी प्याला तोड़कर मुजरिम की तरह आंख चुरा निकल लिए ।
दिनभर उनके सामने नही पड़े,शाम को भी नही,रात में भी उधर का रुख नही किया और ऐसे ही दिन गुज़र गए ।चचा प्याला टूटना भूल गए और हम चचा को ।
महीनों बाद एक महफ़िल में उनसे फिर मुठभेड़ हो गई । हुई तो कैसे,अचानक फर्श पर कुछ टूटने की आवाज़ आई ।लगा कोई चीनी की प्लेट टूटी है । सर उठाकर देखा तो चचा खड़े थे और उनके पाँव के पास प्लेट टूटी हुई पड़ी थी । हम दौड़ के तो गए मगर इशारों इशारों में मुस्कुराकर प्याले का अक्स आंखों में उतार दिया ।चचा ने बड़ी बड़ी फैली आंखों से जिसमे बेहयाई ने इतनी जगह बना ली थी कि शर्म नाम की चीज़ टिक ही न पाए । चचा आँख सीधिकर बोले भय्या बिगड़ेगा उसी से जो कुछ करेगा । जो काम करेगा,उसी से टूट फूट होगी,जिसने काम ही नही किया,वह क्या तोड़ेगा क्या बिगाड़ेगा, निकम्मेपन से टूटना भला । सुनकर खून जल गया ।
तब समझ आया ईश्वर ने इंसानी नस्ल में एक खास किस्म और बनाई है, जो कभी गलती नही करती है । जिसकी गलती भी उसका हुनर है । जिसका निकम्मापन भी खुशबू है । यह कभी गलती नही मानते । इन्हें दूसरे की आंख में तिनका शहतीर दिखाई देता है ।
ऐसे लोगों से दूर तो नही रह सकते मगर करीब रहकर दूर रहिये जिनकी फिलॉसफी में गलती पराई और अच्छाई सगी लगे । जिनके पास हर स्थिति के लिए दो आँखे हों,एक से खुद को आज़ाद करें और दूसरी से दूसरे को क़ैद । ऐसे लोग सर्टिफिकेट बाटते हैं और आप जानते ही हैं सर्टिफिकेट बांटने वाले लोग या पार्टी कितने खतरनाक होते हैं ।
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