मैं विरासत के पन्ने नही खोलूंगा की उसको पलट कर बताऊँ, मेरे बाप दादा हिन्दू मुसलमान एकता के बड़े पैरोकार थे । मैं अपने गुज़र चुके लीडर के बोल दोहराकर नही कहूँगा की वह हिन्दू मुसलमान एकता चाहते थे ।मैं राजा,महाराजा, नवाबों के किस्से सुनाकर भी नही कहूँगा की देखो उन्होंने हिन्दू मुसलमान को एक करने के लिए क्या क्या जतन किया ।
मैं कबीर,रहीम,रसखान,जायसी,खुसरू,तुलसी के दोहे की डोर पकड़ कर तुम्हारी गर्दन पर नही कसूंगा की यह भी हिन्दू मुसलमान की एकता के लिए पल पल जागते रहे । मैं तो रामकृष्ण,विवेकानन्द,साईं, हाजी वारिस,निज़ामुद्दीन,बुल्ले शाह की चौखट की भी दुहाई नही दूंगा हिन्दू मुसलमान एकता के लिए ।
मैं सिर्फ इतना कहूँगा जो मैं हूँ,उसे खुद ही हिन्दू मुसलमान का एका पसन्द है । आजका वक़्त हमारा है, अगर हम एक रह गए तो बहुत लंबी लकीर खिंचने वाली है, वरना पिछली भी लकीर मिट ही जाएगी । मैं आज कहता हूं कि दुनिया के सबसे खूबसूरत वह दोस्त हैं जिनमे एक मुसलमान एक हिन्दू है । तुम यक़ीन जानो होली के रंग में डूबे मुसलमान से ज़्यादा कोई भी खूबसूरत तस्वीर मेरे दिल में नही पहुँचती । रोज़े में जब कोई हिन्दू सहरी के लिए मुसलमान को जगाता है, यह आवाज़ ही तो दुनिया की सबसे मधुर आवाज़ है ।जब कोई मुसलमान बड़े मंगल पर शर्बत बाँटता है, तो वह हाथ ही तो चूमने लायक हैं और जब कोई हिन्दू मोहर्रम में ग़म के साथ खड़ा होकर शर्बत के गिलास उठाता है, वह ही तो सबसे खूबसूरत पल होता है । वैसे तो यह बड़ा आम सा है । मगर हमे खुद नही पता जो आम है, वही खास है ।
हम तो हर चीज़ से अनजान बड़े हो रहे थे । दिल अली की तरफ झुकता था तो कभी बजरंगबली की तरफ । हमे क्या पता था कि इनमें से एक चुनना है ।हम राम पर लपकते थे और मोहम्मद पर जान छिड़कते थे क्या पता था कि इनमें से एक चुनना है । कान्हा के दीवाने थे तो मूसा के किस्से ज़बान पर थे,क्या पता था इनमे से एक चुनना है । हमे तो हर अच्छी चीज लुभाती थी । भगवान के हम बच्चे ही तो थे,जो हर भगवान को ले लेना चाहते थे क्या पता था कि कोई डन्डी लेकर उंगलियां तोड़ देगा अगर हमने एक से ज़्यादा चुन लिया ।
हिन्दू मुसलमान अगर यह एक नही हो सकते तो यकीन जानो ज़मीन पर और कोई एक रह ही नही सकता । जो इन्हें तोड़कर रखना चाहता है, वह सिर्फ और सिर्फ हुक़ूमत का लालची है । बहुत आए और दफ़न हो गए इसको तोड़ने वाले,डलहौजी तक को तो हम सब मिलकर निगल चुके हैं । पूरी ब्रिटेन की हुक़ूमत को अपने चबूतरे पर पानी पिलाया है । हम टूटे तब ही हैं, जब हमारे बीच से किसी ने गद्दारी की है । एक बार गद्दारी की तो मुल्क टूटा अब फिर कोई अली बजरंगबली के तान छेड़ रहा है, उसकी कोशिश दिल बांटने की है ।
ऐसे गद्दारों पर नज़र रखिये,यही हैं जो दिलों को फाड़कर,ख्वाबो को चकनाचूर करके सिर्फ हुक़ूमत की फसल काटना चाहते हैं । सम्भल जाओ उससे पहले की पिछड़ जाओ । हर नफरत फैलाने वाले को मिटा दो जब वक़्त मिले, यह शूल है,जिसे गुखरू बनते देर नही लगेगी । आओ और अपने आजके वक़्त को साथ चलकर तय करें ।दिलों के मैल को धो दो और एक दूसरे की तमाम कमियों को नज़रंदाज़ करके आने वाले कल का सितारा बुलन्द करो । भारत का स्वर्णिम भविष्य हिन्दू मुसलमान की एकता में गुंथा है ।जो इसे पाना चाहता है, एक हो,जो रोकना चाहता है, वह तोड़ने के मिशन में लगा रहे ।
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