Monday, April 1, 2019

बंट मत जाना

मुझसे अगर कोई कहे की मैं तुम्हारे भाइयों को क़त्ल करके तुम्हे एक आलीशान बंग्ला दूँगा।जिसमे गाड़ियों की क़तारें होंगी ।इतने नौकर चाकर होंगे की झुक कर जूतों की डोरियाँ भी नही बांधनी पड़ेंगी ।
कोई कहे की अगर तुम्हारी बहन और माँ को खत्म करके तुम्हे एक शानदार ज़िन्दगी देंगे ।जिसमे मेरे बच्चों का चमकता हुआ फ्यूचर होगा ।मेरी ज़िन्दगी ऐसी हो जाएगी जिसे अड़ोसी पड़ोसी देख जलकर ख़ाक हो जाएँगे ।तो यक़ीन जानो एक सेकण्ड भी हमे सोचना नही पड़ेगा और मैं कहूँगा की दफ़ा हो जाओ,अगर ऐसी ज़लील सोच के साथ दोबारा फटके यहाँ ।मुझे यहभी यक़ीन है की आप भी ऐसे ऑफर देने वाले शख्स को चुटकियों में भगा देंगे ।

कोई मुझे मेरे पड़ोसी के सर की क़ीमत पर चमचमाते महलों के ख्वाब दिखाए,तो यकीन जानो उसके मुँह पर थूककर हम पड़ोसी के साथ खड़े मिलेंगे । फिर पड़ोसी से चाहे झगड़ा हो या नाराज़गी हो मगर इसमे किसी बाहरी के दख़ल को हम बर्दाश्त नही कर सकते ।

आखिर कोई कैसे इतना सेल्फिश हो सकता है की अपने भाई बहन के ख़ून पर अपनी तरक्की के ख्वाब देखे ।कोई कैसे अपने साथ पले बढ़े दोस्तों के कटे पिटे जिस्म से खुद की तरक्की के टाइल्स जोड़े । कोई कैसे उन्हें मिटाने के ख्वाब पाल सकता है, जिनके साथ वह बड़ा हुआ हो । हम तो छप्पर में रह लेंगे ।हफ्तों भूखे रह लेंगे ।घर में लाइट पंखों की शिकायत ज़बान पर नही आने देंगे ।बस, हम सब भाई बहन साथ रहें ।हमारा सबका साथ दुनिया की हर तरक्की,हर सुक़ून,हर आराम से बेहतर है ।

हमे लगता है, हम निराले नही हैं ।देश के भी बहुत से लोग यही करेंगे ।फिर एक बार देश को घर समझिये और सबको भाई ।अब देखिये कौन हमे विकास के नाम पर अलग कर रहा है ।ऐसे ऑफर तो आपको और हमे रोज़ ही मिल रहें हैं ।जो इस ऑफर को अपना रहें हैं, यह वही लोग हैं जो कल अपनी सिर्फ अपनी तरक़्क़ी के लिए अपने सगे भाई के ख़ून पर पाँव रखकर निकल जाएँगे ।अपनी ही बहन को टुकड़ों में बंटता देख आँख बन्द करके अपने बच्चे का,सिर्फ अपने बच्चे का चमकता भविष्य देखेंगे ।

हम अपने भाई से रूठ सकते हैं, लड़ सकते हैं, सालों बिना बोले नाराज़ रह सकते हैं मगर उसके ख़ून की क़ीमत पर अपने घर में खुशियों की कल्पना भी नही कर सकते ।यही हाल मेरे देश के लिए हैं, हर वह तरक्की मेरे लिए ज़हर है जो मेरे किसी भी धर्म के भाई को खत्म करके,मिटाकर,भगाकर या ज़लील कर के की जाए ।मुझे मेरी इंसानियत से भरी ग़रीबी मुबारक,मेरे सब मेरे साथ हों,भले इन सबका या हमारा विकास हो न हो ।अभी वक़्त है, ठहर कर आँगन में फूल बोइये वरना यह बल काँटे आने वाली नस्लों को खूब चुभेंगे। धर्मो के असली रस,प्रेम को सिखाइये और बढ़ाइए...जो लोगों को बाँट रहा,वह अधर्मी है । उसका मार्ग ही गलत है, वह रॉन्ग नम्बर है ...

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