बाढ़ जब आती है, तो सिर्फ पानी ही साथ नही लाती है । तमाम गन्दगी,तमाम बीमारियाँ साथ लाती है और जाती है तो तमाम ज़िंदगियां,तमाम ख्वाब साथ लिए जाती है । ठीक इसी तरह झूठ भी सिर्फ झूठ नही होता । जब यह आता है तब इसके कंधे पर बैठकर अन्याय आता है । अन्याय की पीठ पर लटक कर अधर्म आता है । अधर्म की आँखों में ज़ुल्म पलता है और जब यही ज़ुल्म ज़मीन पर उतरता है, तो ज़माना इसे भुगतता है ।
यह बड़ी मज़बूती से जान लीजिए झूठ के बिना अन्याय टिक ही नही सकता । तभी तो आपको कसम खिलाई जाती थी,जो कहेंगे सच कहेंगे,सच के सिवा कुछ नही कहेंगे । सबको पता है, झूठ अन्याय का मार्ग बनाता है ।
दुनिया की हर धार्मिक किताब ने झूठ को पाप ही कहा है ।अब जरा सोचिए,जो व्यक्ति सुबह से शाम झूठ ही बोलता रहता हो,वह कितना अन्यायी,पापी,अत्याचारी होगा,कल्पना मुश्किल भी नही ।
एक बात गिरह बाँध लें,यदि शासक झूठा है । तो उसके शासन के अंग भी झूठ से संक्रमित होंगे । एक विवेकवान व्यक्ति झूठ और सत्य के एक जैसे दिखते मार्ग में सत्य के मार्ग को पहचानकर आगे बढ़ जाता है और मूर्ख झूठ की ओर,जिसका अंत विनाश है ।
यह बड़ी मामूली सी बात लगती है कि सच बोलना चाहिए,झूठ नही । मगर यह कर पाना बहुत कठिन काम है । क्योंकि जो सर से पाँव तक झूठा नही है, वह तो आसानी से मान लेगा मगर जो झूठा है, वह इसे मानेगा ही नही । उसे तो झूठ में गुंधे ख्वाब और उम्मीद का सुर सुनाई देगा । अभी कोई वक़्त नही गुज़रा,घर मे सच बोलने की प्रैक्टिस शुरू करदें ताकि अपने ऊपर जिसे बैठाएं, वह सच्चा हो । प्रैक्टिस इसलिए कीजिये,ताकि सच-झूठ में फर्क कर पाइए ।
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