कभी चिकन कारीगरी ग़ौर से देखिएगा । हम सबकी ज़िन्दगी इसी तरह है । ऊपर से देखने से लगेगा कि कच्चे धागों ने क्या शानदार डिज़ाइन बनाई है । इन धागों की कढ़ाई फूल पत्तियों की शक्ल में उभर कर मन मोह लेगी ।
मगर एक बार पलट कर कपड़े को देख लीजियेगा,बेतरतीब,उलझे हुए तागों के झुंड दिखाई देंगे । यही फ्लॉसफी तो पकड़कर चलने की ज़रूरत है । जो तागे एक ओर जितने उलझे हैं, वही दूसरी ओर खूबसूरत फूल पत्तियां बना रहें हैं ।
हमारी ज़िंदगियां,जो जर वक़्त मुस्कुराते चलती हैं, उसके पीछे भी बहुत से तागे उलझे हुए हैं । यह उलझना ही तो ज़िन्दगी की डिज़ाइन बनाता है, जो जितने सलीके से उलझा है, उसकी ज़िंदगी उतनी खूबसूरत दुनिया को दिखाई देगी...अक्सर कहता हूँ कि जब कभी हाथ मे कभी खूबसूरत कढ़ाई किया हुआ कपड़ा हाथ आए, उसे फ़ौरन पलट कर देखो,पीछे कढ़ाई से ठीक उलटे धागे चिपटे हुए दिखेंगे । तब सबक लेना इतनी शिद्दत से उलझे हुए होगे, तभी ज़माना तुम्हारी खूबसूरती को देखेगा ।
चिकन कढ़ाई को पलटकर देखना और तय कर लेना ज़िन्दगी ऐसी ही है ।बहुत मेहनत,तमाम जुगाड़ और मकसद पर आँख रखकर ही कोई आकृति उभारी जा सकती है । जो उलझा नही,वह सुलझा भी नही।
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