मुझे नही अच्छा लगता जब कोई डिम्पल जी को डिम्पल भाभी कहता है । यह भाभी शब्द ही अखरता है । भाभी एक बेहद निजी रिश्तों का शब्द है,जिनमे गरिमा,संवेदना और मातृत्व गुंथा हुआ है । यह सार्वजनिक नही होता,जैसे ही सार्वजनिक होता है, मज़ाक़ बन जाता है । मेरी नज़र में वह एक ऐसी नेता भी हैं, जिनका खुद का वजूद है । जिनमें देश की सभ्यता पैबस्त है । जिनमे वह तमाम खूबियां हैं, जो एक लीडर में होनी चाहिए । जो कम बोलती हैं मगर तार्किक और संतुलित बोलती हैं ।
देश ने कभी फ़िरोज़ गाँधी की वजह से इंदिरा को भाभी कहने की हिम्मत नही की । मेनका गांधी को भाभी नही कहा,सोनिया गाँधी को भाभी नही बल्कि सम्मान से मैडम ही कहा । यहाँ तक राबड़ी देवी को उस दौर में भाभी नही कहा गया,बल्कि राबड़ी देवी ही कहकर संबोधित किया गया । बेगम नूरबानो हों या आज़म खान की पत्नी किसी को भाभी कहने की हिम्मत किसी ने नही की राजनीति में । यहाँ तक जसोदा बेन को भी कभी भाभी नही ही कहा गया । हेमा मालिनी हों या शबाना आज़मी इनको भी भाभी नही कहा गया बल्कि बेटी माना गया ।स्वरूप कुमारी बख्शी जी को उस ज़माने में भी बख्शी दीदी ही कहा गया ।
यह मीडिया के कुछ मनचलों और अति उत्साही कार्यकर्ताओं के साथ ही,दूसरे गिरोह के शातिर लोगों की हरकतें हैं । ऊपर बताए हर नेता को या तो देश की बेटी कहा गया या तो बहु मगर किसी को भाभी नही कहा गया ।
हमे मालूम है जिसदिन डिम्पल यादव में आप देश की बेटी देखने लगेंगे नज़रिया ही बदल जाएगा । यह तरीका होता है किसी को गम्भीर बनाने का या किसी की गम्भीरता खत्म करने का,समाजवादी साथियों को इन साजिशों से बचना होगा ।
डिम्पल जी हमारे देश की बेटी हैं, जिनमे लीडरशिप की तमाम खूबियां हैं । आजतक एक भी उल्टा सीधा बयान नही । जब तमाम नेता ज़बान पर फिसल रहे हों,तब भी डिम्पल यादव ने मज़बूती से खुद को संभाले रखा ।
अगर डिम्पल भाभी हैं, तो तमाम महिला नेता जिनके पति राजनीति में हैं या थे,सबको भाभी कहना शुरू कीजिए । देखिये,आपको वह कैसा सबक सिखाएँगे । वह खुद उन्हें मैडम कहने लगते हैं, तो हर एक कहने लगता है ।
डिम्पल यादव, मेनका गाँधी,प्रियंका गांधी,राबड़ी,मीसा भारती, सुषमा स्वराज,सुमित्रा महाजन,मीरा कुमार,मायावती,ममता बनर्जी,निर्मला सीतारमण और रीता बहुगुणा जैसी ही देश की बेटी,बहन या बहु हैं ।
डिम्पल जी लीडर हैं और लीडर पर वह रिश्ते नही थोपे जाते,जिनसे गम्भीरता पर असर पड़े । डिम्पल यादव को मीडिया समेत हर कार्यकर्ता को या विरोधी को डिम्पल जी,डिम्पल यादव या समाजवादी लीडर कहकर ही सम्बोधित करना चाहिए । हम उनके विरोधी हों या समर्थक,उनकी गरिमा को सम्मान देना होगा । तमाम राजनैतिक बेटियों और बहुओं की तरह ही डिम्पल यादव इस देश की बेटी हैं । जो देश की संसद में कई बार रहकर राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं । मोदी लहर में भी उन चंद नेताओं में हैं जिन्होंने अपनी सीट बनाए रखी,जब तमाम धुरन्धर हारे,यह कम बड़ी बात नही है ।
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