Tuesday, July 16, 2019

ईश्वर और राजनीति

वह रोज़गार माँगने वाले आ रहे थे,मैंने उन्हें ईश्वर की तरफ मोड़ दिया ।
वह स्वास्थ्य के लिए सिस्टम की तरफ बढ़ते की मैंने उन्हें ईश्वर की ओर मोड़ दिया ।
वह भयँकर बाढ़ में डूबने से बचने को व्यवस्था के कॉलर पकड़ते की मैंने उन्हें ईश्वर की इच्छा की ओर मोड़ दिया ।

वह जो कुछ भी चाहते थे,वह सरकार दे तो सकती थी मगर ईश्वर ज़्यादा अच्छे से दे सकता था । थोड़ा इंतेज़ार ही तो करवाता है ईश्वर,जीवन,सिर्फ एक दो जीवन भर ।
यह  लोग जो घिसट घिसट के ,क़तारों में लगकर,सड़कों पर चटाई बिछाकर नमाज़ पढ़ते हुए,पहाड़ो पर नंगे पाँव घण्टिया बजाते हुए,मांग क्या रहें हैं, वही तो पूरा करने के लिए सरकार थी । बेचारे ईश्वर के आगे रोते हैं, इन्हें नही पता,इनके हिस्से की प्रार्थनाएं ईश्वर ने पूरा करने के लिए मनुष्य ही को बनाया है ।

नादान अपनी बनाई सत्ता से मांग नही सकते,ईश्वर के आगे गिड़गिड़ाते हैं । खिसियाए हुए यह लोग,एक दूसरे के धर्म को अपनी तरक्की का रोड़ा मानकर खुद को महामूर्ख बनाते हैं । यह तरस खाने वाले लोग हैं, जो यह नही जानते,किससे क्या मांगना है, ईश्वर पर जितना भयँकर दबाव होगा,सत्ता उतनी चैन की नींद सोएगी ।

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