"हफ़ीज़ को निपटाएँ भी तो निपटाएँ कैसे,मम्मी-दीदी तक तो उसके मोह में हैं । उनके सामने हफ़ीज़ को कैसे हटाएँ,यह सम्भव नही ।"
यह तुम पढ़ तो रहे होंगे,दोस्त । हाँ दोस्त,तुम यहीं फेसबुक पर भी हो और बचपन से हर वक़्त मेरे नज़दीक़ भी । यह सब ही पढ़ लें और देख लें कि इस जीवन मे हमने भी कितने ब्रूटस कमाएँ हैं,.... तुम भी😢
यह मेरे बड़े ही नज़दीकी के कन्वर्सेशन में से एक टुकड़ा भर है । बताइये दिल और विश्वास का टूटना क्या होता है । बताइये इन्हें हमे मारने की ही क्या ज़रूरत,यह इतना भर कह देते की हफ़ीज़ मेरा तुम पर भरोसा नही रहा । इतने भर से मेरा जैसा इंसान मर ही जाता ।
यह बातचीत इस बात पर ही कि मेरा दोस्त आज भी हमसे क्यों बातचीत करता है । उसका दोस्त उससे पूछता है कि तुम तो भाजपा से बढ़िया से जुड़े हो,यह हफ़ीज़ अब तक काहे हैं, ऊपर से तुम्हारे घर भी आना जाना लगा है । सब उससे ही प्रभावित हैं ।
तो मेरे दोस्त का जवाब बड़ा शानदार है कि "बताओ,उसे हटाएँ तो कैसे हटाएँ। वह राम की तो कभी कृष्ण की बात करता है । मेरे घर के कितने मसले हल किये हैं, अगर कुछ कह दिया,तो घर मे ही तमाशा हो जाएगा । हफ़ीज़ को निपटाने के रास्ता मुझे नही दिखता,झेला जाए,जब तक झेल सकें"
यह बात सुनने के बाद मैं वाक़ई निपट गया हूँ । एक बात तो बताए ही दे रहा हूँ कि मैं इतनी आसानी से मिटने वाला नही हूँ । छिपकर या खुलकर सामने आ जाओ,रत्तीभर डरता नही हूँ । मुझे पता है कि मेरे रास्ते मे तुम जैसे तमाम दोस्त,रिश्ते अपना रंग दिखाएँगे ही,हम भी रुककर अफसोस करेंगे, फातिहा पढ़कर आगे बढ़ जाएँगे । जब तुम्हारे पिता,शराब पीकर,पूरे घर को तमाशा करते हुए,तुम्हारी ही माँ पर हाथ उठाएं, तब हफ़ीज़ हफ़ीज़ कहकर मेरा नाम ले लेना । इतने भर से तुम सब उस रात सुक़ून से सो जाओगे । तुम्हारा धर्म भी खतरे में नही आएगा । तुम्हारा बेलगाम पिता भी भयँकर नशे में शांत हो जाएगा ।
अफसोस ज़रूर है कि जहाँ इतने दिन दोस्ती का नक़ाब ओढ़े थे और दिन ओढ़े रहते मगर यह भी तो है । धर्म इतना सर चढ़कर बोलेगा,तुम्हे इतनी घुटन होगी अगर ज़रा सा भी पहले मुझे पता होता,तो तुम मेरी याददाश्त से कबके मिट जाते ।
हाँ एक आखरी बात अगर तुम्हें तुम्हारी धर्म की रक्षा में किसी की हत्या करनी हो,तो सबसे पहले मुझे चुनना,क्योंकि इतना वक़्त तुम्हारे साथ बिताया है, तो उसका इतना हक़ तो बनता है । तुम पढ़ रहे होगे, समझ भी रहे होगे, मान लेना,मुझे तुम खुद अपने हाथ से क़त्ल करना । अच्छा लगेगा,तुम्हे भी,हमे भी...
यह #हैशटैग नही है, यह वह बात है, जो चार दिन पहले घटी है, कोई अफसोस न करे,बस देखे मेरे दोस्त की घुटन तो देखे...
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