Monday, July 22, 2019

सावन को आने दो

कुछ दिख रहा है आपको।अपनी गर्दन को दूसरी तरफ मोड़िये देखिये ज़मीन ने कैसी चादर ओढ़ रखी है।पूरी धानी धानी हो रखी है।हर तरफ हरियाली उमड़ रही है।यह पता है क्या है, यह ज़मीन की टीन एज है।ज़मीन सालभर में एक पूरी उम्र जीती है, तो यह जो सावन है न यह उस उम्र की टीन एज है।इस वक़्त हर चीज़ बढ़ रही होती है एक नशे में,एक अल्हड़पन में,एक मदमस्ति में।इस वक़्त कोई भी घाँस का टुकड़ा तोड़िये तो उसमे इतना पानी होगा की नाख़ून भीग जाएँ।

सावन महादेव का भी महीना है।
वही जिनमे भोलापन,अल्हड़पन,प्रेम है।आप सोच रहे होंगे शिव जी के गुस्से का ज़िक्र हमने क्यों नही किया।वह इसलिए की सावन में भी भला कोई गुस्से की बात करेगा।यह मौसम तो प्रेम और हल्के डूबने वाले नशे का है।यानि प्रेम नशे का।मदमस्त प्रकृति को छू लेने का मौसम।प्रकृति का यौवन इस वक़्त सर चढ़ कर बोलता है।हरी हरी घाँस जब पैरो को छूती है तो जो गुदगुदी लगती है वह रूह को तरोताज़ा कर देती है।पछिया हवाएँ जब ठण्ड साथ लाती हैं तो टूटकर बादल बरसते हैं।

मैं ज़मीन की इस टीन एज को देख पा रहा हूँ।मुरझाए से मुरझाए पेड़ को सर तानकर बात करते हुए देख पा रहा हूँ।अमरुद कच्चे ज़रूर हैं मगर रसदार हैं।ज़रा से दहलीज़ से पाँव सरकाइये तब देखिये यह सावन आपका सारा ज़हर मारकर आपमे प्रेम भर देगा।हल्की हल्की नींद और हल्के हल्के जागने में दिमाग कुछ सुकून पाता है।

मिटटी सख्ती को छोड़कर मुलायम हो जाती है।वह कीचड़ की शक्ल में आपसे लिपटने को बेताब हो जाती है।इस मौसम में इंसान क्या कीड़े मकौड़ों को भी नया जीवन मिल जाता है।सावन जिस्म के उस हिस्से को तरो ताज़ा करता है जो सालभर थक कर चकनाचूर हो जाता है।इस एक महीने में प्रकृति इतनी ऊर्जा भर देती है की सालभर आप उससे जी सकें।यह जो ज़मीन ने हरी चुनरी ओढ़ी है, वह बता रही की मेरे गुस्सैल बच्चों आओ और मुझसे लिपट जाओ।यहाँ तुम्हे उस माँ का प्यार मिलेगा जिसे तुम सिर्फ ज़बान से माँ कहते हो।सावन में ज़मीन पूरे सालभर किये गए पापों के धब्बों को बहा देती है, फिर एक नई हरी कालीन बिछाती है।

आओ और फिर अपनी नफ़रत और झगड़े से इसे पूरे साल ख़ून से रँग दो।मगर मैं फिर सब साफ़ करके तुम्हारे लिए सावन लाऊंगी।जिस दिन सावन आना बन्द हो जाए तब समझ लेना की प्रकृति तुमसे नाराज़ हो गई,तब तक इस नरम गरम धानी धानी घाँस में लोटो पोटो।आओ हम,तुम,इस ज़मीन के साथ उसी टीन एज में पहुँच कर, सब भूलकर,खेलें,मज़े करें, तफ़रीह करें, गाने गाए।चलो यौवन को दस्तक दें।खट खट खट खट, आओ तुम्हारा सावन आया है।

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