Sunday, July 21, 2019

प्रेम सावन का

पूरे साल तुम्हारी एड़ियों से घिस घिस करके जो धरती अपना रूप बिगाड़ लेती है।तुम्हारे गन्दे दिमाग से उपजे कामो को बर्दाश्त करते करते उसकी मुस्कान मिट जाती है । तुम्हारे ज़हर को पीते पीते खुद कुम्हला जाती है। तुम सब जो पूरे साल उसकी छाती पर मूँग दलते हो,वह इससे इसी महीने निपटती है।
सावन मेरी धरती के मेकप का महीना है।वही महीना,जब धरती दोबारा उठने को तैयार होती है ।

पूरे साल जितना तुम बिगाड़ते हो उससे ज़्यादा वह इस महीने में कवर कर लेती है।सावन का महीना हमारे हिस्से की धरती के निखरने का महीना है।वह इस महीने इतना कुछ खुद में समेट लेगी की तुम साल भर लूट लूट कर खाना,बिना फ़िक्र किये उसकी हरी घाँस में ख़ून को बहाते जाना,वह सब पीकर तुम्हे अच्छे फल,फसल और पानी देती रहेगी।
सावन जितना धरती के ऊपर उसे निखारेगा उससे कहीं ज़्यादा धरती के अंदर निखरेगा।

खैर अगर इस महीने में भी तुम्हारा दिमाग ताज़ा न हुआ।उसमे कहीं खुरचन भर भी नफ़रत रह गई।इस महीने के गुज़रने के बाद भी अगर तुम अपने साथ के नागरिकों से लड़ते रहते हो तो यह सावन सिर्फ और सिर्फ धरती के लिए आया है।तुम्हारे लिए नही।।।

हो सके तो झूले पर अपने उन दोस्तों के साथ बैठ जाओ,जिन्हें राजनीती,धर्म या जाति की वजह से पीछे छोड़ आए हो और लम्बी लम्बी पीगें बढ़ाओ ताकि देश लहलहाता हुआ आगे खुले आसमान में बढ़ जाए....यही तो सावन की आमद है।मज़े करो,दिमाग को ताज़ा और खुशबूदार करो,ताकि इस बार भी यह सावन निराश न जाए ।
जिस दिल मे प्रेम न पहुँचे वहाँ सावन कभी पहुँच ही नही सकता ।जिस दिल मे सावन हिलोरे लें,वहां नफ़रत भला कहाँ रह सकती है । सावन निर्माण की पहचान है, जो प्रेम से ही सम्भव है । विनाश करने वाले हाथ नफरत के हुनर से छजते है, उनमें सावन का क्या ही काम ।सावन का हर वह मज़ा ले,जिसके दिल मे प्रेम के बीज हैं और बेचारे, वह लोग मायूस होकर देखें इस सावन को जिनके दिल मे प्रकृति और मानव मात्र से प्रेम नही है ।

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