जब तक आपको मूर्ति में भगवान दिख रहें है तब तक आप ईश्वर से मिलने की पहली ही सीढ़ी पर हैं।जैसे ही ईश्वर मूर्ति से आज़ाद हो जाए वह दूसरी सीढ़ी है और जब यह आपमे दिखने लग जाए तो यह अंतिम सीढ़ी है।आप किसी भी सीढ़ी को नकार नही सकते,हाँ समझ के साथ आप आगे बढ़ते हैं।यह लफ्ज़ हमारे नही हैं।यह वह गहराई के अल्फ़ाज़ हैं जो मेरे कान हमेशा सुनते रहे हैं।दिल ने हमेशा आपके हर लफ्ज़ को उतारा है।मैं सोचता हूँ की आप पर लिखने का साहस भला कब आएगा।
आप पर मैं लिखूं,यह कैसे हो सकता है।आपके क़दमों में लिखूं यह भी तो आपको नही पसंद था। अब आप सामने हैं, तो सबकुछ दिखने लगा है । आपका यौवन ओढ़े गम्भीर चेहरा अजब सी रौशनी पैदा करता है।आपको पढ़ा,सुना फिर जब आपसे अकेले घंटों बातें की तब खुद को समझ सका।वह आप ही तो थे जिसनें आखों को ऐसे खोला की दीवार के पार दिखने लगा।दिमाग को ऐसे परत दर परत खोला की किसी तरह का मैल नही रह गया।
मेरी ज़िन्दगी को हर घङी जिसनें मज़बूत किया वह ही तो थे आप ,वही तो थे मेरे विवेकानन्द।आपनें हमे क्या पढ़ाया और लोगों नें आपको कैसे पढ़ा इसमें बङा फ़र्क है।
आपने हमे मोहब्बत के साथ मिलकर रहने को सिखायाऔर दूसरे आपके ही नाम पर नफ़रत बांट रहे।मैं तो दावे से कहता हूँ मेरे विवेकानन्द नें 39 साल की मामूली सी उम्र में जो वैचारिक,आध्यात्मिक और सामाजिक रेखा खींची है उसे इस काल में तो कोई छूने वाला नहीं, पार करना तो सोचे भी ना।
हां बीती रात उन्होंने हमसे कहा दोस्त घबराना नहीं जितना दिल करे मेहनत करो,मुझे एक सुकून पसंद और तरक्की पसंद हिंदुस्तान चाहिए ,मै हर वक्त तुम्हारे पीछे साए की तरह हूँ ।तब से मै भी बेफिक्र हूँ एक दिन ज़रूर हमारा मुल्क मुस्कुराएगा।लिखने को तो बहुत से किस्से याद आ रहे,आखरी वक़्त पर बिस्तर पर पड़े बीमार चिड़चिड़े विवेकानंद को लिख सकता हूँ,दुनिया को रौशनी देता हुआ चमकदार विवेकानंद लिख सकता हूँ मगर कम्बख़्त आंखें भीग कर लिखना दुश्वार कर रहीं हैं और मेरे विवेकानन्द को आंसू पसंद नहीं ।सनातन के साथ सारी दुनिया फख्र करे की उसके पास विवेकानन्द हैं और मै फख्र करू क्योंकि अपनें दोस्त की ज़मीन पर पैदा हुआ हूँ।
लोगों के लिए आज आपकी पुण्यतिथि है, झूठ बोलते हैं लोग।मेरे विवेकानंद मुझमे ज़िंदा हैं।वह रोज़ मुझसे बात करते हैं।डाँटते हैं, समझाते हैं, प्यार करते हैं।विवेकानन्द आप हमारे दिल और ज़हनियत में हमेशा मज़बूती से रहेंगे कल रात वाला वादा फिरसे।
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