Friday, July 26, 2019

तब कहाँ थे

तुम तब कहाँ थे ? इससे ज़लील बात पछले बहुत से सालों में हमने नही सुनी । यह वह वाहियात वाक्य है, जो गुनहगार को बच जाने का रास्ता साफ़ करता है ।

तुम इतना जानो,पिछली गलतियों को अगर ज़रा भी सुधारने की मुझमे ताक़त होती,तो मैं सबसे पहले आदम और हव्वा का गंदुम खाने का मसला ही सुलझा देते । एडम और ईव के वर्जित फल चखने की गलती सुधार देते । मनु और सतरूपा को ऊपर ही रहने की कोई युक्ति करते । इतिहास की यह गलती दुरुस्त हो जाती,तो यकीनन यह एक दूसरे की टांग नोचने वाली इंसानी नस्ल ही शक्ल न लेती । मगर करें तो क्या करें,हमसे तो यह बात लिखने से पहले हुई गलती भी सुधारी नही जा सकती,सिवाए इसके की आगे ऐसी गलती न हो ।

आज लिंचिंग हो,नक्सली हमले हों,तमाम आतंकी हमले हों,2002 के गुजरात दँगें हों,कश्मीरी पंडितों का खूनखराबा  हों,84 के सिखों का कत्लेआम हो हों,भागलपुर या दूसरे दँगें हों,47 का बंटवारा हो,1857 की क्रांति में अंग्रेजों की हिंसा हो, उससे पहले मुगलों का विनाश हो,गोरियों का अत्याचार हो,खिलजियों का ज़ुल्म हो,गुलाम वंश की हिंसा हो,लोदियों का दिया दर्द हो,राजा शुंग का अत्याचार हो,कलिंग की हिंसा हो,मौर्यों के युद्ध हों,कुषाण,मराठा,राजपुताना किसी का भी किसी के साथ अन्याय हो या यूं कहें रावण ,कंस,कौरव ब्रदर्स या स्वर्ग पर राक्षसों के हमले हों,हम सबकी निंदा करते हैं, कड़ी भत्सर्ना करते हैं, फिर भी बताओ,इन सबको सुधार कौन सकता है, कौन है जो इनको सही कहता है ।

टिटहरी की खोपड़ी से भी छोटा दिमाग रखने वालों तुम्हे इतनी सी बात समझ नही आती की हमे आज सुधारना है । हमे आज अन्याय रोकना है । हमे आज हिंसा रोकनी है । हमे आज में ही जीना है, उसे सुधारने की बात करना भला अपराध कहाँ से हो गया । मूर्खों अगर तुम्हारे पास कोई युक्ति हो जिससे ऊपर गिनाया कल बदल सको,तो भाई बदल लो । बाबर को सरहद पर ही रोक  दो । जाओ और खिलजी की ज़बान खींच लो ।

वह सब बड़े ही मक्कार लोग हैं,जिन्हें आज हिंसा दिख नही रही है । जिन्हें भीड़ के हाथों होते मानव वध दिखाई नही पड़ रहे हैं । गुलामी और चाटुकारिता,यही दो चीजें तो हैं, जो किसी भी राष्ट्र को खोखला करती हैं । ताज्जुब तो यह है, इनमे बोलने वाले वह लोग हैं, जो जीव बचाने के अभियान चला रहे,जो पेड़ बचाने की कोशिश कर रहें,जो इनवायरमेंट बचाने को बेचैन हैं, मगर मानव वध रोकने पर गुस्से से लाल पीले हो रहे हैं ।

आखरी बात,सन 47 से आजतक और आज से लोकतंत्र रहने तक,हर वह व्यक्ति,संगठन,पार्टी पूरी तरह गलत है, जो मानव किसी भी मानव वध,हिंसा को सही मानता है । जो हिंसा में खड़े लोगों को सही और हिंसा के खिलाफ खड़े लोगों को गलत मानता है, इस देश का असली दुश्मन वही है । लाखों लोग अधर्म और अन्याय की ओर वाह वाह करने लगे इसका मतलब यह नही की हम अन्याय और हिंसा को धर्म मान लेंगे । यह कल भी गलत था,आज भी गलत है, कल भी गलत रहेगा । मैं तो अपनी अंतिम सांस तक मानव वध को अधर्म और महापाप कहता ही रहूँगा ।

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