एक भिखारी था,उसकी आवाज़ बड़ी मधुर थी । किसी भी गाँव मे वह गाता हुआ जाता,तो लोग प्रेम से उसे कुछ न कुछ दे ही देते । यह दौर चलता रहा कि एक रोज़ गाँव के एक नए नए अमीर हुए व्यक्ति ने भिखारी को गाते सुना ।
वह भिखारी को पकड़कर बोला की तुम कितना कमा लेते हो,भिखारी ने कहा,सुबह से शाम में जितना भी ईश्वर प्रबन्ध कर दे । अमीर इंसान बोला,फिर भी कुछ तो गिनती होगी,भिखारी ने कहा यही पाँच छः हज़ार ।
अमीर इंसान ने भिखारी से कहा कि अगर तुम सिर्फ मेरे लिए,मेरी चौखट पर गाओ तो तुम्हे दस हज़ार मिलेंगे । भिखारी को यह प्रस्ताव भा गया,सोचा उसमें दर दर की ठोकरे खाओ,यहाँ एक ही चौखट पर दस हज़ार मिल रहें, उसने प्रस्ताव मान लिया ।
अब भिखारी जाता,तो बस उसी के दरवाज़े गाता । एक आध लोगों ने उसे बुलाने,कुछ देने की कोशिश की मगर भिखारी ने नही लिया । कई महीने गुज़र गए,दूसरी कोई चौखट उसने नही देखी,बस यहाँ इतना मिल जाता कि वह मगन रहता । गाँव वाले जबरन उसे लाना भी चाहें,तो वह न आए,उस अमीर चौखट पर उसे पूरा आनंद मिल रहा था । बहुत कहने पर वह गाँव वालों को बुरा भला कहने लगा,तो वह भी कतराकर निकलने लगे ।
सालों गुज़र गए,अब भी वह उसी दरवाज़े पर बैठा गाता रहता और अपने तय पैसे लेकर निकल जाता । एक दिन उस अमीर आदमी ने कहा,यार तुम पर हम फ़िज़ूल ही इतना पैसा बर्बाद करते हैं, अब क्योंकि पुराने हो तो हटाएँगे नही,बस तुम्हे अब से पाँच हज़ार ही मिलेंगे । भिखारी चीखा की यह क्या बदतमीज़ी है । अमीर आदमी ने खींचकर एक चांटा दिया और कहा आवाज़ नीची,चुपचाप पांच हज़ार लो और पड़े रहो ।
भिखारी खामोश हो गया,उसने पास से गुजरते दूसरे गांव वालों को देखा, उन्होंने भिखारी की तरफ ध्यान ही नही दिया । कुछ वक्त फिर गुज़रा, अमीर आदमी बोला अब से तुम्हे दरवाज़े झाड़ू पोछा भी करना होगा,कार भी साफ करनी होगी और तीन हज़ार रुपये ही मिलेंगे । भिखारी तिलमिलाकर बोला,यह तो हद दर्जे की बदतमीज़ी है । वह बोला ही था कि उसे एक लात पड़ी । अमीर आदमी ने दो जूते भी मारे और कहा कि औकात भूल रहे हो,तीन चार हज़ार के मोहताज थे,घर घर माँगते फिरते थे,औकात से ज़्यादा दे दिया,तो सर चढ़ गए । होश में रहो, इस चौखट को छोड़ने के बाद कोई तुम्हारे मुँह पर पेशाब भी नही करने आएगा,भिखमंगे,पड़े रहो ।
उस रात भिखारी को बड़ा गुस्सा आया । उसने सोचा कि हमने अपना ज़मीर थोड़े ही बेचा है । हम फिर से घर घर गाएँगे और मस्त ज़िन्दगी जिएंगे । वह चल दिया,गाता जाता,घर निकलते जाते मगर किसी घर से कोई नही निकला । उसने कई घर खटखटाए,कोई निकला तो याद दिलाकर चला गया कि तब कहाँ थे,जब हम तुम्हारे संगीत सुनना चाहते थे । तब तो तुम्हे वह चौखट प्यारी थी । तुम उस चौखट के पालतू हो चुके,अब हम सबके काम के नही हो,तुम्हारी आवाज़ बिक चुकी,बिकी हुई चीज़ें समाज मे कबाड़ बन जाती हैं, यह बाजार नही है ।
भिखारी हफ़्तों टहला,भूखा प्यासा और वापिस उस अमीर की चौखट पर बैठ गया । अमीर ने कहा अब तुम्हे पैसे नही मिलेंगे,बस दो वक्त का खाना और तुम्हे यह खटरागी गाने के साथ कुछ काम भी करना होगा,सफाई,शौचालय की सफाई और जूतों पर पोलिश और मैदान की घाँस भी निकालनी होगी ।
भिखारी की हिम्मत नही पड़ी की वह दो वक्त के खाने के इस प्रस्ताव को ठुकरा सके,उसने सर डाल दिया । उसे चौखट दिखाई दी,चौखट में खुद को बंधा देखा और सर झुकाकर गाते हुए देखा,खुद के सामने फेंकी हुई रोटी देखी और दूसरे गाँव की तरफ असंख्य दरवाज़े देखे,जो देते भले कम थे मगर प्रेम करते थे,बराबरी पर रखते और सम्मान से खेलते नही थे,यही हाल तो मीडिया का हुआ है, वह भिखारी और कौन है सिवाए मीडिया के...
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