हफ़ीज़ क़िदवई कौन हैं?
उत्तर -बर्फ़ का खंजर हैं ,नही नही सूफ़ी सन्त हैं,अरे नही
दोहरे चरित्र की ओढ़न हैं । शायद यह भी नही,वह
सच्चे सीधे सरल इंसान हैं ।
कोई कहता मक्कार और चालक है । किसी ने कहा क़ाबिल हैं, कोई चीखा की सिफर हैं । कोई ने मनचला कहा,तो कोई बोला शातिर ।
किसी ने औरत से नाम जोड़ा तो किसी ने आदमी से,कोई बोला हँसमुख हैं, तो एक बोला गुस्सैल हैं । एक आवाज़ आई कि घमंडी हैं, तो दूसरा बोला बड़ा ही आम सा इंसान है । कोई ने साधू देखा उसमे तो कोई उसमें ख़लीहर हठी इंसान देख भाग आया । एक ने कहा लेखक है तो दूसरा बोला निरा जाहिल है । एक ने कहा वह बोलता अच्छा है तो दूसरा बोला वह क्या ही बोलता है, बकवास । उत्तर में तो यह भी आया कि वह प्रेमी है, तो एक उत्तर आया फ़रेबी है, दिलों को फ़रेब में फँसाकर निकल जाने वाला निर्दयी है । एक ने कहा चालाक लीडर है तो दूसरे ने कहा बेवक़ूफ़ आत्ममुग्ध बैल है । एक ने कहा बेशक़ीमती है तो दूसरे ने कहा फ़िज़ूल है ।
हिन्दू ने कहा मुसलमान है तो मुसलमान बोला हिन्दू है हफ़ीज़ । नास्तिक ने कहा आस्तिक है, आस्तिक ने कहा नास्तिक है हफ़ीज़ । एक ही तो सवाल आया था कि कौन है हफ़ीज़ क़िदवई ।
फिर किसी बूढ़ी अनुभवी लरज़ती हुई आवाज़ ने कहा कहीं वह आईना तो नही और फिर दौड़ गई खामोशी...
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