Sunday, November 3, 2019

धर्म की खूबी कर्म में लाओ

मैं हिन्दुओं से अक्सर पूछता हूँ की तुम्हारे धर्म की अच्छाइयां क्या क्या हैं । वह वाक़ई बहुत प्रसन्न होकर गर्व के साथ अच्छाइयां बताते हैं । मुझे अच्छा लगता है, यह सब सुनकर ।

मैं मुसलमानों से पूछता हूँ कि तुम्हारे पैग़म्बर और तुम्हारे मज़हब में क्या क्या खूबियाँ हैं । मुसलमान भी मेरे दिल मे इस्लाम को लेकर कोई कसर न रह जाए,इसका ध्यान रखते हैं,खूब खूबियाँ बतलाते हैं, मुझे सुनकर सुक़ून मिलता है, खुशी होती है ।

मगर मैं जैसे ही हिंदुओं से यह पूछता हूँ कि जो धर्म की अच्छाई तुमने बताई है उनमें से तुममे खुद में कितनी हैं, तो उनकी आँखों मे मेरे लिए गड़न पैदा हो जाती है । यही मैं मुसलमानों से भी पूछता हूँ कि इस्लाम और रसूल की खूबियों में से तुममे कितनी हैं भाई,तो उनकी आँख में भी मैं चुभने लगता हूँ ।

सच तो है कि मैं इनकी आँखों मे गड़ना या चुभना नही चाहता हूँ, मैं तो बस यह चाहता हूँ जिसको मान रहे हो,उसकी ही मान लो,प्रेम करो ,त्याग को अपनाओ,
समर्पण को दिल मे जगह दो और सरलता को लक्ष्य रखो और मानवता के काम आओ । अब बताओ भला किस धर्म ने इसके खिलाफ शिक्षित किया है, जो भी इनके खिलाफ है, वह धर्म ही कहाँ है, वह तो धर्म के नाम का झांसा है और झांसे में अक्लमंद इंसान फँसा नही करते,मूर्खो की बात और है ।

धर्म के जिस हिस्से को सुनाकर तुम दूसरों को प्रभावित करना चाहते हो,श्रेष्ठ बनना चाहते हो,उस अच्छाई को खुद में उतार लो,मेरा यक़ीन करो,तुम्हे देखकर हर एक प्रभावित होगा । मोहम्मद साहब की ज़िंदगी के किस्से मत गाओ,उन्हें खुद में उतारो, भगवान और अवतारों की कथा मत सुनाओ उन्हें कर्म में उतारो,लोग तुम्हारे साथ तुम्हारे धर्म का सम्मान करेंगे,यह सम्मान प्रेम से होगा,किसी के डर से नही...

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